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अमेरिका का समुद्र में ईरानी युद्धपोत को डुबोना क्या जायज है ?

ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360 by ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360
March 6, 2026
in Featured, अंतराष्ट्रीय
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अमेरिका की एक पनडुब्बी द्वारा इस सप्ताह श्रीलंका से करीब 40 नॉटिकल मील दूर ईरान के युद्धपोत ‘आईआरआईएस देना’ को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो देने की घटना ने पर्यवेक्षकों को चौंका दिया है।

फारस की खाड़ी से इतनी दूर और चीन को पश्चिम एशिया से जोड़ने वाले अहम समुद्री व्यापार मार्ग के पास इस तरह का हमला यह संकेत देता है कि ईरान से जुड़ा यह संघर्ष व्यापक क्षेत्र में फैल सकता है।

यह घटना समुद्री युद्ध से जुड़े उन कानूनी पहलुओं पर भी ध्यान खींचती है, जिन्हें आमतौर पर सैन्य और कानूनी हलकों के बाहर कम समझा जाता है। लोगों के मन में यह सवाल उठा कि क्या यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध था और जहाज डूबने के बाद बचे लोगों को बचाने की जिम्मेदारी किसकी होती है ?

समुद्री युद्ध का कानून, सशस्त्र संघर्ष के कानून का एक हिस्सा है, जो समुद्र में होने वाले युद्ध में शामिल लड़ाकों, नागरिकों और तटस्थ देशों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े नियम तय करता है। यह कानून इस बात से ही स्वतंत्र रूप से लागू होता है कि युद्ध शुरू करने का फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध था या नहीं। भले ही युद्ध की शुरुआत पर विवाद हो, लेकिन युद्ध के दौरान समुद्र में होने वाली सैन्य कार्रवाइयों को इन नियमों का पालन करना होता है।

समुद्र में सैन्य अभियानों का संचालन समुद्री युद्ध के कानून द्वारा नियंत्रित होता है, चाहे युद्ध की औपचारिक घोषणा की गई हो या नहीं। जहां समुद्री युद्ध के कानून और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के बीच टकराव होता है, वहां समुद्री युद्ध का कानून प्राथमिकता रखता है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून के उस सिद्धांत को दर्शाता है, जिसे ‘लेक्स स्पेशलिस’ कहा जाता है, यानी अधिक विशिष्ट कानून लागू होता है।

कानून के अनुसार किसी भी ऐसे देश के युद्धपोत, जो अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्ष में शामिल हों, स्वाभाविक रूप से सैन्य लक्ष्य माने जाते हैं। इसलिए उन पर हमला करना वैध होता है। ऐसे हमले खुले समुद्र में या संघर्ष में शामिल देशों के 12 नॉटिकल मील के क्षेत्रीय जल के भीतर किए जा सकते हैं। हालांकि तटस्थ देशों के क्षेत्रीय जल के भीतर हमला करना वैध नहीं माना जाता।

खबरों के अनुसार ‘आईआरआईएस देना’ श्रीलंका के क्षेत्रीय जल से बाहर संचालित हो रहा था। ऐसे में वह समुद्री युद्ध के कानून के तहत एक वैध सैन्य लक्ष्य माना जाता है। यदि वह श्रीलंका के तट से 12 नॉटिकल मील के भीतर होता, तो हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध माना जाता।

समुद्री युद्ध का कानून जहाज डूबने के बाद बचे लोगों को बचाने की जिम्मेदारी भी तय करता है। 1949 के दूसरे जिनेवा कन्वेन्शन के अनुसार, संघर्ष में शामिल पक्षों को हर सैन्य मुठभेड़ के बाद जहाज डूबने से प्रभावित लोगों, घायलों और बीमारों की तलाश करने और उन्हें बचाने के लिए हर संभव कदम उठाने होते हैं।

हालांकि पनडुब्बियों के लिए यह दायित्व निभाना व्यावहारिक रूप से कठिन हो सकता है। सतह पर आकर बचाव करने से उन्हें खतरा हो सकता है और पनडुब्बियों में लोगों को रखने की क्षमता भी सीमित होती है। ऐसी स्थिति में पनडुब्बी सीधे बचाव करने के बजाय अन्य जहाजों या अधिकारियों को बचे लोगों की जानकारी दे सकती है।

श्रीलंका की नौसेना ने ‘आईआरआईएस देना’ के 32 नाविकों को बचाया और अधिकारियों के अनुसार 87 शव भी बरामद किए गए। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि श्रीलंकाई अधिकारियों को घटना की सूचना कैसे मिली, लेकिन संभावना है कि अमेरिकी नौसेना ने ही बचे लोगों के स्थान की जानकारी दी हो।

विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका की भूमिका की कानूनी वैधता पर बहस जारी हो, लेकिन समुद्र में हुई यह सैन्य कार्रवाई समुद्री युद्ध के कानून के तहत एक वैध सैन्य लक्ष्य पर हमला मानी जा सकती है।

( द कन्वरसेशन )

Tags: अमेरिका का समुद्र में ईरानी
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