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पृथ्वी की कक्षा में बढ़ते उपग्रहों से संकट की आशंका, व्यापक नियमन की मांग

admin by admin
February 19, 2026
in Featured, अंतराष्ट्रीय, देश
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पृथ्वी की कक्षा में बढ़ते उपग्रहों से संकट की आशंका, व्यापक नियमन की मांग

पृथ्वी की कक्षा में तेजी से बढ़ती उपग्रहों की संख्या को लेकर वैज्ञानिकों और विधि विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है और चेतावनी दी है कि यदि प्रभावी नियमन नहीं किया गया तो अंतरिक्ष में उपग्रहों की टक्कर होने और पर्यावरणीय क्षति का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

वैज्ञानिकों और विधि विशेषज्ञों का हालांकि मानना है कि समय रहते ठोस नीतिगत कदम उठाकर स्थिति को संभाला जा सकता है।

अमेरिका के संघीय संचार आयोग (एफसीसी) के समक्ष 30 जनवरी 2026 को स्पेस एक्स ने समक्ष अंतरिक्ष में डेटा केंद्रों को संचालित करने के लिए अधिकतम 10 लाख उपग्रहों को भेजने की अनुमति के लिए आवेदन दायर किया। प्रस्तावित योजना के तहत 500 से 2,000 किलोमीटर की ऊंचाई के बीच निम्न पृथ्वी कक्षा में उपग्रह स्थापित किए जाएंगे। कुछ कक्षाएं लगभग निरंतर सूर्य प्रकाश में रहने के लिए डिजाइन की गई हैं। इस प्रस्ताव पर फिलहाल सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

फरवरी 2026 तक पृथ्वी की कक्षा में करीब 14,000 सक्रिय उपग्रह मौजूद हैं, जबकि लगभग 12.3 लाख प्रस्तावित उपग्रह परियोजनाएं विभिन्न चरणों में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्वीकृति प्रक्रिया मुख्यतः तकनीकी पहलुओं, जैसे रेडियो आवृत्तियों और प्रक्षेपण सुरक्षा, तक सीमित है। सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और व्यापक पर्यावरणीय प्रभावों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता।

विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में उपग्रहों की तैनाती से रात का आकाश स्थायी रूप से बदल सकता है। निम्न पृथ्वी कक्षा के उपग्रह सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले लगभग दो घंटे तक सूर्य का प्रकाश परावर्तित करते हैं।

खगोलविदों ने 2021 में अनुमान लगाया था कि एक दशक से भी कम समय में रात के आकाश में दिखाई देने वाले हर 15 प्रकाश बिंदुओं में से एक गतिशील उपग्रह हो सकता है। उस समय यह अनुमान 65,000 प्रस्तावित उपग्रहों पर आधारित था।

विशेषज्ञों ने ‘केसलर सिंड्रोम’ के खतरे की भी चेतावनी दी है, जिसमें एक टक्कर से मलबे की श्रृंखला बनती है तथा आगे और टक्कर होती जाती हैं। वर्तमान में कक्षा में 10 सेंटीमीटर या उससे बड़े आकार के लगभग 50,000 मलबे के टुकड़े मौजूद हैं। आंकड़ों के अनुसार, यदि टक्कर-रोधी उपाय बंद कर दिए जाएं तो कुछ ही दिनों में बड़ी टक्कर संभव है।

इसके अलावा, बड़ी संख्या में उपग्रहों के प्रक्षेपण से जीवाश्म ईंधन की खपत बढ़ेगी और ओजोन परत को नुकसान पहुंच सकता है। सेवा-समाप्ति के बाद उपग्रहों को वायुमंडल में जलाने से धातुओं का जमाव बढ़ेगा, जिससे रासायनिक प्रतिक्रियाएं तेज हो सकती हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि उपग्रहों की तेज चमक और रेडियो उत्सर्जन खगोलीय अनुसंधान को भी प्रभावित करेंगे, जबकि आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं पर भी असर पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून के तहत अंतरिक्ष वस्तुओं से होने वाले नुकसान के लिए संबंधित देश जिम्मेदार होते हैं। विधि विशेषज्ञों ने ‘डार्क स्काईज इम्पैक्ट असेसमेंट’ लागू करने का सुझाव दिया है, ताकि किसी भी उपग्रह समूह को मंजूरी देने से पहले उसके वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय प्रभावों का समग्र आकलन किया जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि इसका उद्देश्य अंतरिक्ष विकास को रोकना नहीं, बल्कि संतुलित और पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित करना है, ताकि आकाश में हो रहे बदलाव स्थायी संकट में न बदलें।

Tags: पृथ्वी की कक्षा में बढ़ते उपग्रहों
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