नयी दिल्ली, सरकार ने स्मार्टफोन की स्क्रीन को खरोंच और टूट-फूट से बचाने के लिए लगाए जाने वाले सुरक्षात्मक कवर ‘स्क्रीन प्रोटेक्टर’ के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का प्रमाणन अनिवार्य कर दिया है। यह प्रावधान अगले साल एक अप्रैल से लागू हो जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की 21 सितंबर को जारी अधिसूचना के मुताबिक, स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी उत्पाद (अनिवार्य पंजीकरण की आवश्यकता) आदेश, 2021 के दायरे में शामिल किया गया है। इन्हें भारतीय मानक आईएस 19348:2025 के अनुरूप होना होगा।
एक अप्रैल, 2027 से ऐसे स्क्रीन प्रोटेक्टर की बिक्री के लिए निर्धारित भारतीय मानकों का पालन करना और बीआईएस प्रमाणन हासिल करना जरूरी होगा।
स्क्रीन प्रोटेक्टर इस आदेश के तहत अधिसूचित होने वाली 66वीं वस्तु है। सूची में स्मार्टफोन, लैपटॉप, मोबाइल और लैपटॉप चार्जर, एलईडी टेलीविजन, माइक्रोवेव ओवन, प्रिंटर और सेट-टॉप बॉक्स समेत अन्य उत्पाद पहले से शामिल हैं।
इस कदम से कम गुणवत्ता वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर की बिक्री पर अंकुश लगने और घरेलू विनिर्माताओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मोबाइल फोन विनिर्माताओं के संगठन आईसीईए के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने कहा कि अनिवार्य बीआईएस प्रमाणन से उपभोक्ताओं को घटिया उत्पादों से बचाने तथा घरेलू एवं वैश्विक कंपनियों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
मोहिंद्रू ने कहा, ‘‘सालाना 50 करोड़ से अधिक इकाइयों वाले बाजार पर यह फैसला लागू होने से 12,000-16,000 करोड़ रुपये का गुणवत्ता-आधारित उद्योग विकसित हो सकता है। इससे करीब 60,000 प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रोजगार पैदा होने तथा जीएसटी राजस्व में करीब 2,000 करोड़ रुपये के योगदान की उम्मीद है।’’
घरेलू बाजार में टेम्पर्ड ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर की मांग 2025 में करीब 40 करोड़ इकाई और खुदरा मूल्य करीब 20,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं दूरसंचार उत्पादों की विनिर्माता ऑप्टिमस इन्फ्राकॉम के कार्यकारी चेयरमैन अशोक गुप्ता ने कहा कि नोएडा में टेम्पर्ड ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर के उत्पादन के लिए इकाई स्थापित की गई है। इसमें अमेरिकी कंपनी कॉर्निंग की प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जा रहा है और जनवरी, 2027 से आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है।
ऑप्टिमस को चालू वित्त वर्ष में टेम्पर्ड ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर कारोबार से 1,800-2,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है।