(एपी) नाइजीरिया में बंदूकधारी हमलावरों ने एक स्कूल पर धावा बोलकर उसके करीब 300 विद्यार्थियों को पांच मिनट के अंदर अगवा कर लिया। दो दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बच्चों की जानकारी नहीं मिलने पर उनके अभिभावक मायूस हैं।
यह घटना बृहस्पतिवार को इस्लामी चरमपंथियों और सशस्त्र गिरोहों के गढ़ उत्तर पश्चिम नाइजीरिया में घटी। किसी भी समूह ने इस अपहरण की जिम्मेदारी नहीं ली है।
राशिदत हमजा शनिवार को काफी निराश दिखीं। राशिदत के छह बच्चों में से एक को छोड़कर बाकी सभी अगवा किये गये 300 विद्यार्थियों में शामिल हैं।
राशिदत के सात से 18 वर्ष के बच्चे कडुना राज्य के कुरिगा शहर में स्थित स्कूल में पढ़ने गये थे, लेकिन बंदूकधारियों के गिरोह ने उनका अपहरण कर लिया।
अधिकारियों ने कहा कि राज्य में अपहृत विद्यार्थियों में 12 या उससे कम उम्र के कम से कम 100 बच्चे शामिल हैं।
शहर में पहुंची ‘एसोसिएटेड प्रेस’ टीम से हमजा ने कहा, ‘‘हम नहीं जानते कि क्या करना है, लेकिन हम भगवान में विश्वास करते हैं।
कुरिगा में सामूहिक अपहरण की यह घटना पिछले सप्ताह के अंत से अब तक उत्तरी नाइजीरिया में सामूहिक अपहरण की तीसरी घटना है। किसी भी समूह ने इस घटना की अभी तक जिम्मेदारी नहीं ली है।
इसके पहले बंदूकधारियों के गिरोह ने एक अन्य उत्तर-पश्चिमी राज्य सोकोतो के एक स्कूल से 15 बच्चों का अपहरण कर लिया और कुछ दिन पहले पूर्वोत्तर में स्थित बोर्नो राज्य के 200 लोगों का अपहरण कर लिया था जिनमें अधिकतर महिलाएं और बच्चे थे।
विद्यार्थियों के अपहरण की ये घटनाएं नई नहीं हैं। इसके पहले वर्ष 2014 में इस्लामी चरपंथियों ने बोर्नो के चिबोक से 200 से अधिक स्कूली छात्राओं का अपहरण करके पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया था।
एक दशक बाद, अब तक कम से कम 1400 विद्यार्थियों को उनके स्कूल से अगवा किया गया है जिनमें से कुछ को अब भी बंधक बनाकर रखा गया है। इन बंधकों में करीब 100 चिबोक लड़कियां भी शामिल हैं।
शिक्षक नूरा अहमद ने बृहस्पतिवार के अपहरण को याद करते हुए ‘एपी’ को बताया कि विद्यार्थी सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय में अपनी कक्षाओं में थे, तभी दर्जनों की संख्या में बंदूकधारी बाइक पर सवार होकर आए और गोलीबारी करने लगे।
अहमद ने कहा, ‘‘उन्होंने पांच मिनट से भी कम समय में बच्चों का अपहरण करने से पहले किसी तरह की मदद को रोकने के लिए स्कूल को घेर लिया और सभी मार्गों और सड़कों को अवरुद्ध कर दिया।
अपहर्ताओं से बचने के लिए गोलियों का सामना करने वाले 14 वर्षीय अब्दुल्लाही उस्मान ने कहा, ‘‘जिन विद्यार्थियों ने तेजी से आगे बढ़ने से इनकार कर दिया, उन्हें या तो मोटरसाइकिल पर बैठाया गया या हवा में गोलियां चलाकर डराया गया।’’ उस्मान ने कहा, ‘‘हमलावर चिल्ला रहे थे, चलो! चलो! चलो!


