अगर घर को व्यवस्थित रखने की विशेषज्ञ मैरी कोंडो की सोच पर चलें, तो साफ-सुथरा और करीने से सजा घर ही बेहतर घर है, लेकिन महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन शायद इस बात से सहमत नहीं होते। उनके नाम से प्रचलित एक कथन है, ‘‘अगर बिखरी हुई मेज अव्यवस्थित मन की निशानी है, तो फिर खाली मेज किस बात का संकेत है?’’
हाल ही में प्रकाशित मेरे शोध में भी इस आम धारणा पर सवाल उठाया गया है कि घर में बिखरी चीजें एक ऐसी समस्या हैं, जिन्हें हर हाल में ठीक किया जाना चाहिए। इस शोध में न्यूजीलैंड के 22 परिवारों के घरों का अध्ययन किया गया।
शोध से पता चलता है कि घर में बिखरी चीजें हमेशा खराब व्यवस्था या लापरवाही का संकेत नहीं होता। कई बार यह परिवार के सदस्यों के बीच तालमेल बनाए रखने और रोजमर्रा के कामकाज को आसान बनाने में मददगार साबित होता है।
जब घर में बिखरी चीजें जिंदगी को आसान बनाती हैं :
अपने घर के उन हिस्सों के बारे में सोचिए, जिनका इस्तेमाल एक से अधिक कामों के लिए होता है और जहां अक्सर चीजें इकट्ठा होती रहती हैं। मसलन, ‘ड्राइंग रूम’ (बैठक कक्ष) का इस्तेमाल बच्चों के खेलने के लिए भी होता है या शयनकक्ष में पढ़ाई की मेज भी लगी होती है।
एक दंपति ने मुझे बताया कि उनका डाइनिंग टेबल (खाने की मेज) रोजमर्रा की चीजें रखने की जगह बन जाता है। वहां बैग, पानी की बोतलें और दूसरी चीजें रख दी जाती हैं। हालांकि, हर शाम वे इन चीजों को हटाकर मेज साफ कर देते हैं। एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि वह रसोई के बीच बने काउंटर पर कोई जरूरी चीज जानबूझकर छोड़ देता है, ताकि घर से निकलते समय उसे वह चीज याद रहे और वह उसे ले जाना न भूले।
भले ही ये सभी जगहें देखने में बिखरी हुई लगती हों, लेकिन वास्तव में ये परिवार के रोजमर्रा के कामकाज को आसान बनाती हैं। सिर्फ घर को साफ-सुथरा दिखाने के लिए इन व्यवस्थाओं को बदलने से उन दिनचर्याओं में बाधा आ सकती है, जो परिवार के लिए उपयोगी हैं। हम अक्सर बिखरी चीजों को ऐसी वस्तुओं के रूप में देखते हैं, जो हमारे रास्ते में आती हैं या काम में बाधा डालती हैं, लेकिन कई बार कोई जगह इसलिए बिखरी हुई दिखती है, क्योंकि उसका इस्तेमाल कई कामों के लिए किया जा रहा होता है।
एक मां के लिए रसोई का काउंटर डाइनिंग टेबल उनके तथा उनकी बेटी के काम करने की जगह, दोनों का काम करता था। वहां पेन, खिलौने और दूसरी चीजें जमा होती रहती थीं, लेकिन उनका कहना था, ”जब तक वहां खाना खाने भर की जगह बची रहती है, मैं चीजों को वैसे ही रहने देती हूं।”
घर में बिखरी चीजें हमें परिवार के सदस्यों के आपसी रिश्तों के बारे में भी बहुत कुछ बताता है। एक पिता अपनी बेटी का स्वेटर अलमारी में रखने के बजाय कुर्सी की पीठ पर टांगकर छोड़ देते थे। पहले उनकी बेटी स्वेटर को फर्श पर छोड़ देती थी। पिता चाहते थे कि वह जिस तरह अब स्वेटर को कुर्सी पर रखने लगी है, उस छोटे से बदलाव को भी प्रोत्साहन मिले। उन्होंने कहा, ”मैं इसे उसकी एक उपलब्धि मानता हूं।”
एक अन्य महिला ने बताया कि वह अपने साथी की बिखरी हुई चीजों को कुछ हद तक नजरअंदाज कर देती हैं, क्योंकि ”यह घर उसका भी है।” उनका मानना था कि साझा घर को सिर्फ एक व्यक्ति की साफ-सफाई की पसंद के हिसाब से व्यवस्थित नहीं किया जाना चाहिए। कुछ चीजों को वैसे ही छोड़ देना इस बात को स्वीकार करने का तरीका था कि घर दोनों का है।
ये उदाहरण भले ही छोटे लगें, लेकिन इनसे पता चलता है कि घर को व्यवस्थित करने का सामान्य-सा काम भी कई बार बच्चों को प्रोत्साहित करने या अपने साथी के प्रति सम्मान दिखाने का तरीका हो सकता है।
दूसरों की पसंद और रहन-सहन के तौर-तरीकों का सम्मान करने के लिए कभी-कभी चीजों को उनकी तथाकथित ‘सही’ जगह पर न रखना ही ज्यादा समझदारी और संवेदनशीलता भरा कदम होता है।
कब चीजों को समेटना जरूरी है?
तो क्या हमें घर की सफाई करना छोड़ देना चाहिए और हर तरह के बिखराव को स्वीकार कर लेना चाहिए? ऐसा बिल्कुल नहीं है।
पहले हुए शोधों में घर की अव्यवस्था को तनाव, शर्मिंदगी और परिवार के सदस्यों के बीच विवाद से जोड़ा गया है। बिखरी चीजों के कारण जरूरी सामान ढूंढना मुश्किल हो सकता है, किसी जगह का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता या घर के किसी दूसरे सदस्य के लिए अतिरिक्त काम बढ़ सकता है।
हमारा अध्ययन इन समस्याओं से इनकार नहीं करता। इसके बजाय, यह बताता है कि किसी जगह को सिर्फ देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि वहां बिखरी चीजें वास्तव में परेशानी पैदा कर रही हैं या नहीं। इसके लिए यह समझना जरूरी है कि उस जगह का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है और वहां चीजें क्यों रखी गई हैं।
हमने पाया कि घरों में बिखरी चीजों को संभालने के मुख्य रूप से तीन तरीके अपनाए जाते हैं। पहला, चीजों को समेटकर उनकी जगह पर रख देना। दूसरा, उन्हें वैसे ही रहने देना और तीसरा, उन्हें नजरों से छिपा देना।
एक महिला ने बताया कि वह अपने साथी की गोल्फ की गेंदों और दूसरी चीजों को अलमारी के नीचे सरका देती थीं, ताकि वे दिखाई न दें। वहीं, एक अन्य महिला अपने रोजाना इस्तेमाल किए जाने वाले पोषक पूरक (सप्लीमेंट्स) रसोई के काउंटर पर ही रखती थीं, न कि रसोई के सामान रखने वाली अलमारी में। इसकी वजह यह थी कि अगर वह उन्हें अलमारी में रख देंगी, तो संभव है कि उन्हें (पोषक पूरक को) समय पर लेने की बात याद न रहे।
ये फैसले एक ऐसी बात की ओर इशारा करते हैं, जिस पर पहले के शोधों में अक्सर ध्यान नहीं दिया गया। घर को साफ-सुथरा रखने के लिए परिवार के अलग-अलग सदस्यों की जरूरतों, दिनचर्या और अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। जो चीज एक व्यक्ति को बिखरी हुई या अव्यवस्थित लगती है, वह किसी दूसरे के रोजमर्रा के जीवन के लिए बेहद जरूरी हो सकती है।
हमारे अध्ययन से यह भी पता चलता है कि घर में साफ-सफाई और व्यवस्था शायद ही कभी स्थायी बनी रहती है। लोग जब किसी जगह का इस्तेमाल करते हैं, तो वहां चीजें बिखरने लगती हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें समेटकर जगह को फिर से व्यवस्थित कर दिया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद वहां दोबारा चीजें बिखरी दिखाई देती हैं। हर समय सब कुछ करीने से रखने की कोशिश में अक्सर उन व्यवस्थाओं को बार-बार बदलना पड़ता है, जो दरअसल किसी काम को आसान बनाने के लिए बनाई गई थीं।
इसका मतलब यह नहीं है कि घर में बिखराव को स्वीकार कर लिया जाए, लेकिन जो घर देखने में पूरी तरह व्यवस्थित हो, यह जरूरी नहीं कि वह उसमें रहने वाले लोगों के लिए सबसे बेहतर भी हो। शायद किसी अच्छे और व्यवस्थित घर को परखने का सही पैमाना यह नहीं है कि वह कितना साफ-सुथरा दिखाई देता है, बल्कि यह है कि वह उसमें रहने वाले लोगों की जरूरतों को कितनी अच्छी तरह पूरा करता है।