लखनऊ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति प्रकाश सिंह ने अयोध्या के पूराकलंदर थाने में दर्ज पोक्सो और दुष्कर्म के मामले में आरोपी मुकेश की नियमित जमानत याचिका मंजूर कर ली है। आरोपी की ओर से अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने अदालत में पैरवी की।
मामला क्राइम नंबर 121/2026 से जुड़ा है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) और 64(1) तथा पोक्सो अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 23 फरवरी 2026 को शिकायतकर्ता की 17 वर्षीय बेटी घर से लापता हो गई थी। इसके बाद उसके पिता ने गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कराई। मामले में धाराएं बढ़ाए जाने के बाद पुलिस ने 26 फरवरी 2026 को मुकेश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इससे पहले 13 मार्च 2026 को विशेष न्यायाधीश (पोक्सो एक्ट-I), अयोध्या ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने पीड़िता के भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 180 और 183 के तहत दर्ज बयानों का हवाला दिया। बचाव पक्ष के मुताबिक, पीड़िता ने अपने बयान में आरोपी के साथ करीब चार वर्षों से प्रेम संबंध होने और परिजनों द्वारा मारपीट किए जाने के बाद अपनी इच्छा से उसके साथ जाने की बात कही थी। अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि पीड़िता को आरोपी की अभिरक्षा से बरामद नहीं किया गया था।
बचाव पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उसमें चोट के निशान या यौन हमले की पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा, अधिवक्ता ने उच्चतम न्यायालय के कथित हालिया फैसले ‘उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अनिरुद्ध एवं अन्य (2026)’ का संदर्भ देते हुए पोक्सो कानून के दुरुपयोग से संबंधित दलील भी रखी।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद आरोपी की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। आदेश में आरोपी के 26 फरवरी 2026 से जेल में निरुद्ध होने और उसके आपराधिक इतिहास से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया गया। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, आरोपी एक अन्य चोरी के मामले में पहले से जमानत पर है।
अदालत ने निर्देश दिया कि मुकेश को संबंधित निचली अदालत की संतुष्टि पर व्यक्तिगत बांड और समान राशि की दो जमानतें दाखिल करने के बाद रिहा किया जाए। साथ ही उसे मुकदमे के दौरान साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने, गवाहों को प्रभावित न करने और सुनवाई की प्रत्येक तारीख पर अदालत में उपस्थित रहने की शर्तों का पालन करना होगा।