नई दिल्ली, डीजल की खुदरा और थोक कीमतों में बड़े अंतर के चलते निजी पेट्रोल पंपों पर बढ़ी मांग के बीच केंद्र सरकार ने ईंधन की बिक्री सीमित करने के फैसले पर कड़ा रुख अपनाया है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने गुरुवार को स्पष्ट कहा कि किसी भी कंपनी को पेट्रोल या डीजल की बिक्री पर सीमा लगाने की अनुमति नहीं है।
उन्होंने कहा कि ईंधन की बिक्री सीमित करना स्वीकार्य नहीं है और इस संबंध में सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब निजी ईंधन कंपनियों Jio-bp और Nayara Energy के कुछ पेट्रोल पंपों पर डीजल की खरीद की मात्रा सीमित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, Jio-bp के कुछ आउटलेट्स पर एक ग्राहक को प्रतिदिन अधिकतम 50 लीटर डीजल देने की सीमा बताई गई, जबकि Nayara Energy के अलग-अलग आउटलेट्स पर यह सीमा 70 से 200 लीटर तक बताई गई।
इस स्थिति की मुख्य वजह खुदरा और बल्क डीजल की कीमतों में बढ़ता अंतर है। रिपोर्टों के अनुसार, खुदरा पंपों पर डीजल की कीमत बल्क ग्राहकों को मिलने वाले ईंधन की तुलना में करीब 40 रुपये से लेकर 50 रुपये प्रति लीटर तक कम हो गई है।
इसका फायदा उठाते हुए कारखानों, दूरसंचार कंपनियों, होटल, अस्पताल, डेटा सेंटर और अन्य बड़े उपभोक्ता बड़ी मात्रा में डीजल खरीदने के लिए खुदरा पेट्रोल पंपों का रुख करने लगे हैं।
बड़ी मात्रा में खरीद बढ़ने से कुछ निजी पेट्रोल पंपों के स्टॉक पर दबाव पड़ा है। रिपोर्टों में बताया गया कि कुछ औद्योगिक और अन्य बड़े उपभोक्ता एक बार में 400 से 600 लीटर तक डीजल खरीद रहे थे। पेट्रोल पंपों की भंडारण क्षमता सीमित होने और दोबारा आपूर्ति में समय लगने के कारण निजी कंपनियों ने कुछ स्थानों पर खरीद की मात्रा सीमित करने का कदम उठाया।
पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने कहा कि सरकार पहले भी निजी कंपनियों को ईंधन की बिक्री सीमित करने के संबंध में पत्र और निर्देश जारी कर चुकी है। उन्होंने दोहराया कि सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा कि मंत्रालय निजी ईंधन कंपनियों के संपर्क में है, हालांकि उन्होंने इस संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी।
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में खुदरा और बल्क ईंधन कीमतों का अंतर महत्वपूर्ण है। पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें मई 2026 से स्थिर रही हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।
दूसरी ओर, औद्योगिक और अन्य बल्क उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव से अधिक प्रभावित हुई हैं। इसी वजह से दोनों श्रेणियों के बीच कीमतों का अंतर बढ़ा है।
सरकार ने इससे पहले जून में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के खुदरा पंपों पर अस्थायी रूप से 200 लीटर प्रतिदिन की सीमा और कुछ बड़े उपभोक्ताओं को निर्धारित उपभोक्ता पंपों से ईंधन लेने की व्यवस्था लागू की थी। हालांकि, आपूर्ति स्थिति में सुधार के बाद इन अस्थायी उपायों को 1 जुलाई 2026 से वापस ले लिया गया था।