अहमदाबाद, गुजरात उच्च न्यायालय ने अडाणी एंटरप्राइजेज की ओर से दायर आपराधिक मानहानि मामले में पत्रकार रवि नायर की याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को उनके वकील को इस बात के लिए फटकार लगाई कि तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते समय अदालत को यह नहीं बताया गया कि नायर ने जमानत के लिए अधीनस्थ अदालत का भी रुख किया है।
न्यायमूर्ति एमके ठक्कर की एकल पीठ ने कहा कि गांधीनगर की सत्र अदालत नायर को पिछले सप्ताह ही जमानत दे चुकी है। इसके बाद उच्च न्यायालय ने नायर की याचिका का निपटारा कर दिया और मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की।
उच्च न्यायालय ने कहा कि जो पक्ष अदालत के असाधारण अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करता है, उससे अपेक्षा की जाती है कि वह सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को पूरी ईमानदारी और स्पष्टता के साथ अदालत के सामने रखे, भले ही कोई तथ्य उसके मामले के खिलाफ ही क्यों न जाता हो।
अदालत के समक्ष यह भी सामने आया कि नायर ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने के साथ-साथ गांधीनगर सत्र अदालत में नियमित जमानत की अर्जी भी दाखिल की थी।
नायर को 17 सितंबर को उस समय न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, जब अपील की सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होने के मामले में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था।
इससे पहले गांधीनगर की एक अदालत ने 10 फरवरी 2026 को अडाणी एंटरप्राइजेज की शिकायत पर दर्ज आपराधिक मानहानि मामले में उन्हें एक वर्ष के साधारण कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। नायर ने इस फैसले के खिलाफ अपील की थी और मार्च में उन्हें जमानत मिली थी।
सितंबर में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट की उनकी अर्जी खारिज होने के बाद अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया था। नायर ने इसके खिलाफ गुजरात उच्च न्यायालय का रुख किया। 23 सितंबर को उच्च न्यायालय ने तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए आदेश 30 सितंबर के लिए सुरक्षित रखा था। इसी बीच 24 सितंबर को गांधीनगर सत्र अदालत ने उन्हें नियमित जमानत दे दी।
अडाणी एंटरप्राइजेज ने 2021 में नायर के कुछ लेखों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले में नायर की दोषसिद्धि के खिलाफ अपील अभी लंबित है।