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व्हाट्सऐप वेब के जरिए फैल रहे मैलवेयर, साइबर सुरक्षा एजेंसी सीईआरटी-आईएन ने किया आगाह

ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360 by ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360
June 29, 2026
in उत्तर प्रदेश, देश
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व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे ऐप के लिए ‘सिम-बाइंडिंग’ की समयसीमा 31 दिसंबर तक बढ़ी

व्हाट्सऐप वेब और डेस्कटॉप उपयोगकर्ताओं को मैलवेयर के जरिए बड़े पैमाने पर निशाना बनाया जा रहा है, जिससे लोगों के उपकरणों तक अनधिकृत पहुंच बनाने तथा संवेदनशील जानकारी चुराने की कोशिश की जा रही हैं। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सीईआरटी-आईएन) ने यह जानकारी दी।

सीईआरटी-आईएन ने व्हाट्सऐप वेब और डेस्कटॉप उपयोगकर्ताओं को किसी भी फाइल को लेकर सावधान रहने की चेतावनी दी है, भले ही वे किसी दोस्त, सहकर्मी या परिवार के सदस्य की तरफ से ही क्यों न प्राप्त हुई हों।

एजेंसी ने 25 जून को जारी परामर्श में कहा, ‘‘यह देखा गया है कि बड़े पैमाने पर मैलवेयर फैलाने के एक अभियान से व्हाट्सऐप डेस्कटॉप और व्हाट्सऐप वेब उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है।’’

कैस्परस्की और सिक्योरलिस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि खतरा पैदा करने वाले लोग हैक किए गए व्हाट्सऐप अकाउंट का इस्तेमाल करके सीधे पीड़ितों को खतरनाक फाइल भेजते हैं। इससे मैसेज असली लगते हैं और सफल हमले की आशंका काफी बढ़ जाती है।

सीईआरटी-आईएन ने कहा, ‘‘हमलावर पहले से हैक किए गए व्हाट्सऐप अकाउंट का इस्तेमाल करके उपयोगकर्ता के परिचित लोगों को खतरनाक फाइल भेजते हैं। जान पहचान वाले व्यक्ति के नंबर से मैसेज आने की वजह से इन्हें प्राप्त करने वाला व्यक्ति फाइल को खोलने के लिए जल्दी तैयार हो सकते हैं।’’

मैलवेयर हमले में सफलता मिलते ही साइबर अपराधी उपकरण का रिमोट एक्सेस (उपकरण पर नियंत्रण) हासिल कर सकते हैं, धोखाधड़ी वाली गतिविधियों के लिए निजी जानकारी चुरा सकते हैं। इन सब से लोगों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

Tags: व्हाट्सऐप वेब के जरिए
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सूचना एवं  प्रसारण मंत्रालय ने टीवी रेटिंग नीति2026 जारी की है, जो भारत में टेलीविज़न रेटिंग को विनियमित करने के लिए व्यापक दिशानिर्देश तय करती है। यह नीति टीवी रेटिंग सेवाएँ देने वाली एजेंसियों के पंजीकरण, संचालन, ऑडिट और निगरानी के लिए स्पष्ट मानक तय करती है, जिसका उद्देश्य दर्शक मापन में पारदर्शिता, स्वतंत्रता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। टीवी रेटिंग नीति 2026 ने भारत में टीवी रेटिंग एजेंसियों के लिए 16 जनवरी 2014 के विद्यमान दिशानिर्देश की जगह ली है। नीति के तहत किए गए प्रमुख सुधारों में शामिल हैं: नेटवर्थ की शर्त को 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये करना; कनेक्टेड टीवी और ओटीटी  प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध टीवी चैनलों सहित कई प्लेटफॉर्म पर टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल दर्शक मापन; मीटर वाले घरों की संख्या 50,000 से बढ़ाकर 80,000 करके सैंपल साइज़ बढ़ाना; हर तीन साल में एस्टैब्लिशमेंट सर्वे; व्यूअरशिप डेटा की गणना में लैंडिंग पेज को शामिल न करना; vi, सालाना स्वतंत्र ऑडिट; और .vii नियमों का पालन न करने पर अलग-अलग स्तर का जुर्माना ढांचा। अनुशंसित सुरक्षा उपायों में क्रॉस-होल्डिंग पर रोक, एजेंसी के बोर्ड में कम से कम 33 प्रतिशत स्वतंत्र डायरेक्टर की ज़रूरत, हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट) की स्थिति पैदा करने वाली कंसल्टेंसी या सलाह देने वाली गतिविधियों पर रोक, सुरक्षा मंज़ूरी की आवश्यकता और रेटिंग एजेंसियों की कामकाज और संचालन संबंधी स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट और पारदर्शिता की ज़िम्मेदारियाँ शामिल हैं। इस नीति के तहत, भारत में टेलीविज़न रेटिंग के कारोबार में लगी किसी भी संस्था को कुछ अतिरिक्त शर्तों का पालन करना होगा और नई पॉलिसी के तहत पंजीकरण कराना होगा। अभी तक, नई नीति के तहत...

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