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अमेरिकी नाकेबंदी के जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया के बंदरगाहों को निशाना बनाने की दी धमकी

ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360 by ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360
April 14, 2026
in अंतराष्ट्रीय
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तेहरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और शांति समझौते को स्वीकार करने का दबाव डालने के लिए अमेरिकी नौसेना ने सोमवार से सभी ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की नाकेबंदी करने की घोषणा की। जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी बंदरगाहों को निशाना बनाने की धमकी दी।

इससे दोनों पक्षों के बीच युद्ध-विराम के विफल होने और लड़ाई फिर से छिड़ने की आशंका बढ़ गई, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल-गैस की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच 28 फरवरी को हुए सशर्त युद्ध-विराम समझौते को स्थायी शांति में बदलने के लिए पिछले सप्ताहांत पाकिस्तान में हुई वार्ता बेनतीजा रही। दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिर से शुरू होगी या नहीं, इस संबंध में फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका की ओर से निर्धारित समय सुबह 10 बजे (पूर्वी समयानुसार) ईरान के सभी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से पोतों की आवाजाही अवरुद्ध की गई या नहीं।

समुद्री सुरक्षा की निगरानी करने वाली ‘यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी’ ने नाविकों के लिए एक नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया है कि नाकेबंदी में “बंदरगाहों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे सहित पूरी ईरानी तटरेखा” शामिल है।

इसमें कहा गया है कि “गैर-ईरानी ठिकानों से आने वाले या वहां जाने वाले जहाजों के लिए जलडमरूमध्य से गुजरने पर प्रतिबंध नहीं होने की खबरें हैं”, लेकिन क्षेत्र में जहाजों को “सैन्य उपस्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग’ (आईआरआईबी) के मुताबिक, “फारस की खाड़ी और ओमान सागर में सुरक्षा या तो सभी के लिए होगी या किसी के लिए भी नहीं।

ईरानी सेना ने कहा, “इस क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।

इससे पहले, अमेरिका ने घोषणा की थी कि वह सोमवार को पूर्वी समयानुसार सुबह 10 बजे या ईरान के स्थानीय समयानुसार शाम साढ़े पांच बजे से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू करेगा।

कुछ विश्लेषकों का कहना कि अमेरिका के लिए केवल बल प्रयोग के जरिये जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करना मुश्किल होगा और अभी यह स्पष्ट भी नहीं है कि नाकेबंदी कैसे काम करेगी या अमेरिकी बलों के लिए क्या खतरे हो सकते हैं।

‘यूएस सेंट्रल कमांड’ (सेंटकॉम) ने कहा कि यह नाकेबंदी “सभी देशों के उन पोतों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी”, जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं। सेंटकॉम ने कहा कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।

गौरतलब है कि विश्व के 20 फीसदी कच्चे तेल का परिवहन होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर होता रहा है।

ये घोषणाएं पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को हुई लंबी युद्धविराम वार्ता के बिना किसी समझौते के समाप्त होने के बाद की गईं।

इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध संबंधी विचारों को लेकर पोप लियो 14वें पर असाधारण रूप से निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि पोप ‘‘बहुत अच्छा काम’’ कर रहे हैं या ‘‘वह बहुत उदारवादी व्यक्ति हैं’’ तथा उन्हें ‘‘कट्टर वामपंथियों को खुश करना बंद कर देना चाहिए।

ट्रंप ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब लियो ने सप्ताहांत में संकेत दिया था कि ‘‘सर्वशक्तिमान होने का भ्रम’’ ईरान में अमेरिका-इजराइल युद्ध को हवा दे रहा है। पोप और राष्ट्रपति के विचारों में मतभेद होना असामान्य नहीं है, लेकिन किसी पोप का किसी अमेरिकी नेता की सीधे आलोचना करना असामान्य है और इसके बाद दी गई ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया भी सामान्य नहीं है।

अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू करने की घोषणा के बाद बाजार में शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में तेजी आई।

अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत आठ प्रतिशत बढ़कर 104.24 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल का मूल्य सात प्रतिशत बढ़कर 102.29 अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया।

ईरान युद्ध के दौरान ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आया है। फरवरी के आखिर में युद्ध शुरू होने से पहले इसकी कीमत लगभग 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी, जो कुछ समय में बढ़कर 119 अमेरिकी डॉलर से अधिक तक पहुंच गई। शुक्रवार को शांति वार्ता से पहले जून के लिए ब्रेंट क्रूड वायदा 0.8 प्रतिशत गिरकर 95.20 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रह गया था।

इस बीच, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर ने सोमवार को ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) रेडियो से कहा कि ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी में ब्रिटेन शामिल नहीं होगा।

ईरान का कहना है, ‘‘अगर तुम लड़ोगे, तो हम लड़ेंगे।’’ ईरान के शीर्ष अधिकारियों ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी। सैन्य सलाहकार और रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर मोहसेन रेजाई ने लिखा कि होर्मुज़ नाकेबंदी का मुकाबला करने के लिए देश की सशस्त्र सेनाओं के पास ‘कई महत्वपूर्ण अप्रयुक्त साधन’ मौजूद हैं।

वार्ता में ईरान का नेतृत्व कर चुके ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने ईरान लौटने पर ट्रंप को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘अगर तुम लड़ोगे, तो हम लड़ेंगे।’’ ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका कब्जा है।

पाकिस्तान में हुई वार्ता में अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व करने वाले उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने कहा कि वाशिंगटन को ‘‘इस बात की पक्की प्रतिबद्धता चाहिए होगी कि वे (ईरान) परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेंगे।’’

एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ईरानी वार्ताकार अमेरिका की सभी ‘शर्तों’ पर सहमत नहीं हो सकते। इन शर्तों में ईरान द्वारा कभी भी परमाणु हथियार हासिल न करना, यूरेनियम संवर्धन बंद करना, प्रमुख संवर्धन सुविधाओं को नष्ट करना, अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को वापस लेने की अनुमति देना, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना और हमास, हिजबुल्ला और हूती विद्रोहियों को वित्तपोषण बंद करना शामिल था।

ईरानी अधिकारियों ने कहा कि दो-तीन अहम मुद्दों पर बातचीत टूट गई, जिसके लिए उन्होंने अमेरिका के अत्यधिक हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया। गालिबफ ने वार्ता में हुई प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि अब अमेरिका को यह तय करना होगा कि वह हमारा भरोसा जीत सकता है या नहीं।

न तो ईरान और न ही अमेरिका ने यह संकेत दिया कि 22 अप्रैल को युद्धविराम समाप्त होने के बाद क्या होगा।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार ने कहा कि उनका देश आने वाले दिनों में नए सिरे से बातचीत शुरू करने की कोशिश करेगा। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, ईरान ने कहा कि वह बातचीत जारी रखने के लिए तैयार है।

अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को युद्ध शुरू करने से बहुत पहले ही ईरान का परमाणु कार्यक्रम तनाव का केंद्र बिंदु रहा है। इस लड़ाई में ईरान में कम से कम 3,000, लेबनान में 2,055, इजराइल में 23 और खाड़ी के अरब देशों में एक दर्जन से अधिक लोग मारे गए हैं, और आधा दर्जन देशों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।

तेहरान लंबे समय से परमाणु हथियार बनाने की कोशिश से इनकार करता रहा है, लेकिन असैन्य परमाणु कार्यक्रम के अपने अधिकार पर जोर देता है।

वर्ष 2015 का ऐतिहासिक परमाणु समझौता एक साल से अधिक की बातचीत के बाद हुआ था, लेकिन बाद में ट्रंप के चलते अमेरिका इससे बाहर हो गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का समृद्ध यूरेनियम भंडार, हालांकि हथियार-ग्रेड का नहीं है, लेकिन तकनीकी रूप से इसे हासिल करने में बस कुछ ही कदम बाकी हैं।

Tags: अमेरिकी नाकेबंदी के जवाब
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