Saturday, August 1, 2026
  • About Us
  • Contact Us
  • Home
publicnews360
  • Login
  • होमपेज
  • अयोध्या
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • अंतराष्ट्रीय
  • खेल
  • राजनीति
  • क्राइम
  • व्यापार जगत
No Result
View All Result
  • होमपेज
  • अयोध्या
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • अंतराष्ट्रीय
  • खेल
  • राजनीति
  • क्राइम
  • व्यापार जगत
No Result
View All Result
publicnews360
No Result
View All Result
  • होमपेज
  • अयोध्या
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • अंतराष्ट्रीय
  • खेल
  • राजनीति
  • क्राइम
  • व्यापार जगत

सोशल मीडिया से बच्चे सीख रहे हैं एआई का उपयोग, शिक्षक कैसे बनाए रखें अपनी गति?

admin by admin
September 11, 2025
in Featured
0

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) निबंध लेखन, भाषाओं का अभ्यास और गृह कार्य पूरा करने के तरीकों को तेजी से बदल रही है। शिक्षक भी अब पाठ योजना, मूल्यांकन और फीडबैक के लिए एआई उपकरणों का प्रयोग कर रहे हैं। लेकिन यह बदलाव इतनी शीघ्रता से हो रहा है कि स्कूल, विश्वविद्यालय और नीति-निर्माता इसके साथ कदम मिलाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।

इस तेज बदलाव के बीच अक्सर एक बुनियादी सवाल छूट जाता है — छात्र और शिक्षक वास्तव में एआई का उपयोग सीख कैसे रहे हैं?

वर्तमान में यह सीखना अधिकांशतः अनौपचारिक तरीकों से हो रहा है। छात्र टिकटॉक या डिस्कॉर्ड पर सुझाव साझा करते हैं या चैटजीपीटी से निर्देश लेते हैं। शिक्षक स्टाफ रूम में आपस में चर्चा करते हैं या लिंक्डइन पर जानकारी हासिल करते हैं।

हालांकि यह नेटवर्क जानकारी तेजी से फैलाते हैं, लेकिन इसमें पूर्वाग्रह, निगरानी या समानता जैसे गहरे मुद्दों पर विचार नहीं होता। यहीं पर औपचारिक शिक्षक प्रशिक्षण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

जिज्ञासा से आगे बढ़कर

शोध से पता चला है कि अधिकतर शिक्षक एआई के लिए तैयार नहीं हैं। हालिया अध्ययन में पाया गया कि कई शिक्षकों को एआई उपकरणों की विश्वसनीयता और नैतिकता का आकलन करने का कौशल प्राप्त नहीं है।

व्यावसायिक प्रशिक्षण आमतौर पर तकनीकी प्रशिक्षण तक ही सीमित रहता है, जबकि व्यापक सामाजिक और नैतिक पहलुओं की अनदेखी की जाती है। बिना आलोचनात्मक दृष्टिकोण के एआई का उपयोग पूर्वाग्रह और असमानता को बढ़ावा दे सकता है।

इस समस्या को समझते हुए, माउंट सेंट विन्सेंट विश्वविद्यालय में एक स्नातक स्तरीय पाठ्यक्रम में मैंने एक व्यावसायिक विकास मॉड्यूल तैयार किया। इसमें शिक्षक प्रशिक्षुओं को निम्नलिखित गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया :

(1) एआई उपकरणों के जरिए फीडबैक और नकल की पहचान का व्यावहारिक अभ्यास,

(2) एआई के उपयोग को शामिल करते हुए मूल्यांकन डिजाइन करना,

(3) बहुभाषी कक्षा में नैतिक दुविधाओं का केस विश्लेषण।

इसका उद्देश्य केवल एआई चलाना सीखना नहीं था, बल्कि आलोचनात्मक सोच विकसित करना था।

भविष्य के शिक्षकों के लिए आलोचनात्मक सोच

इन सत्रों के दौरान एक स्पष्ट चलन उभरा—शिक्षक प्रशिक्षु एआई को लेकर बेहद उत्साहित थे और यह उत्साह अंत तक बना रहा। उन्होंने दावा किया कि अब वे उपकरणों का मूल्यांकन बेहतर कर सकते हैं, पूर्वाग्रहों को पहचान सकते हैं और एआई का विवेकपूर्ण उपयोग कर सकते हैं।

सबसे उल्लेखनीय बात यह थी कि एआई से संबंधित उनकी भाषा भी बदल गई। शुरुआत में जहां वे भ्रमित थे, वहीं बाद में वे “एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह” और “सूचित सहमति” जैसे शब्दों का आत्मविश्वास से उपयोग करने लगे।

एआई साक्षरता को उन्होंने केवल तकनीकी कौशल के रूप में नहीं, बल्कि व्यावसायिक निर्णय के रूप में देखा — जो शिक्षाशास्त्र, सांस्कृतिक उत्तरदायित्व और उनकी शिक्षक पहचान से जुड़ा है।

यह प्रायोगिक कार्यक्रम दर्शाता है कि उत्साह की कमी नहीं है, बल्कि जरूरत है संरचित शिक्षा की, जो सोचने की भाषा और ज़िम्मेदारी का भाव दे सके।

संस्थागत असंगतियाँ

यह कक्षा आधारित अनुभव वैश्विक स्तर पर संस्थागत चुनौतियों को भी दर्शाता है। दुनिया भर के विश्वविद्यालयों ने एआई पर असंगत नीतियां अपनाई हैं—कुछ इसे प्रतिबंधित करते हैं, कुछ सावधानीपूर्वक समर्थन करते हैं और कई इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं करते। इससे भ्रम और अविश्वास उत्पन्न होता है।

सहकर्मी एमिली बैलेंटाइन के साथ, हमने कनाडा के उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एआई नीति ढांचे का विश्लेषण किया। संकायों ने एआई की संभावनाओं को स्वीकार किया, लेकिन समानता, शैक्षणिक ईमानदारी और कार्यभार को लेकर चिंता भी जताई।

हमने एक “संबंधात्मक और भावनात्मक” दृष्टिकोण को नीति में शामिल करने का सुझाव दिया, क्योंकि एआई केवल दक्षता नहीं बल्कि शिक्षण संबंधों और विश्वास को भी प्रभावित करता है।

संक्षेप में, एआई का कक्षा में समावेश शिक्षक-छात्र संबंधों को फिर से परिभाषित करता है और शिक्षकों की पेशेवर भूमिका को भी बदलता है। जब संस्थान स्पष्ट दिशा नहीं देते, तब शिक्षक स्वयं “नैतिक विशेषज्ञ” बन जाते हैं—बिना किसी संस्थागत समर्थन के।

एआई साक्षरता को पाठ्यक्रम में शामिल करना

नीतियां ज़रूरी हैं लेकिन अकेले पर्याप्त नहीं। एआई को वास्तव में शिक्षा का सहायक बनाने के लिए संस्थानों को ऐसी सोच और आदतों में निवेश करना होगा जो इसके विवेकपूर्ण उपयोग को संभव बनाएं।

शिक्षक शिक्षा को एआई साक्षरता का नेतृत्व करना चाहिए : यदि एआई पढ़ने-लिखने और मूल्यांकन को बदल रहा है, तो यह सिर्फ एक वैकल्पिक कार्यशाला नहीं हो सकता। इसे पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

नीतियां स्पष्ट और व्यावहारिक हों : शिक्षक प्रशिक्षुओं ने बार-बार पूछा, “विश्वविद्यालय की अपेक्षा क्या है?” संस्थानों को एआई के अनुचित (घोस्ट राइटिंग) और उचित (फीडबैक सपोर्ट) उपयोग में अंतर स्पष्ट करना चाहिए।

सीखने वाले समुदाय आवश्यक हैं : एआई का ज्ञान स्थिर नहीं है। जैसे-जैसे उपकरण और मानदंड बदलते हैं, वैसे-वैसे ज्ञान भी बदलता है। फैकल्टी सर्कल, साझा संसाधन और अंतरविषयक मंच शिक्षक समुदायों को सहयोग और बहस का अवसर प्रदान कर सकते हैं।

समानता को केंद्र में रखें : एआई उपकरण अक्सर अपने प्रशिक्षण डेटा से पूर्वाग्रह लेते हैं और बहुभाषी छात्रों के लिए चुनौतियाँ पैदा करते हैं। संस्थानों को समानता मूल्यांकन करने चाहिए और पहुंच के मानकों से एआई अपनाने की प्रक्रिया को जोड़ना चाहिए।

लोगों में एआई को लेकर चर्चा या तो नवाचार के उत्साह या नकल की आशंका के बीच झूलती है। लेकिन यह दृष्टिकोण छात्रों और शिक्षकों के एआई सीखने की वास्तविक जटिलता को नहीं पकड़ता।

अनौपचारिक नेटवर्क त्वरित सुझाव दे सकते हैं, लेकिन वे नैतिक समझ विकसित नहीं करते। इसके लिए संरचित और औपचारिक शिक्षक शिक्षा आवश्यक है।

जब शिक्षकों को एआई का अन्वेषण करने के लिए सुव्यवस्थित अवसर मिलते हैं, तो वे तकनीक के उपयोगकर्ता से निर्देशक की भूमिका में आ जाते हैं। यह बदलाव महत्वपूर्ण है, ताकि शिक्षक केवल तकनीकी बदलावों के प्रति प्रतिक्रियाशील न रहें, बल्कि सीखने, समानता और शिक्षाशास्त्र को सशक्त बनाने के लिए एआई के उपयोग की दिशा निर्धारित कर सकें।

Tags: सोशल मीडिया से बच्चे सीख रहे हैं एआई का उपयोग
Previous Post

SSB ने नेपाल में जेल तोड़कर भागे 60 संदिग्ध कैदियों को पकड़ा

Next Post

Watch, यूपी बोर्ड से जुड़ी दो फर्जी वेबसाइट्स पकड़ी गई, असली वेबसाइट की करें पहचान!

Related Posts

होर्मुज में तनाव के बीच 14 भारतीय जहाज सुरक्षित निकले
Featured

रूसी सेना के साथ अब भी काम कर रहे करीब दो दर्जन भारतीय, रिहा कराने के प्रयास जारी : विदेश मंत्रालय

August 1, 2026
बिना सिर खोले ब्रेन ट्यूमर हटाया: भारतीय-अमेरिकी आर्मी सर्जन मेजर पटेल की अनोखी तकनीक
Featured

बिना सिर खोले ब्रेन ट्यूमर हटाया: भारतीय-अमेरिकी आर्मी सर्जन मेजर पटेल की अनोखी तकनीक

July 31, 2026
क्या सख्त भाषा बनाती है बेहतर लीडर? नई रिसर्च में मिला हैरान करने वाला जवाब
Featured

क्या सख्त भाषा बनाती है बेहतर लीडर? नई रिसर्च में मिला हैरान करने वाला जवाब

July 27, 2026
Origin Energy में डेटा सेंध की घटना असामान्य, लेकिन क्या डेटा को सुरक्षित रखने के तरीके मौजूद हैं!
Featured

Origin Energy में डेटा सेंध की घटना असामान्य, लेकिन क्या डेटा को सुरक्षित रखने के तरीके मौजूद हैं!

July 24, 2026
Next Post

Watch, यूपी बोर्ड से जुड़ी दो फर्जी वेबसाइट्स पकड़ी गई, असली वेबसाइट की करें पहचान!

Recent Posts

अयोध्या: DIG कार्यालय में मुख्य आरक्षी डॉ. ओमप्रकाश सिंह और कर्मचारी अंगदराम को दी गई भावभीनी विदाई

अयोध्या: DIG कार्यालय में मुख्य आरक्षी डॉ. ओमप्रकाश सिंह और कर्मचारी अंगदराम को दी गई भावभीनी विदाई

by Atul Narain Srivastava
August 1, 2026
0

अयोध्या, पुलिस उपमहानिरीक्षक कार्यालय, अयोध्या परिक्षेत्र में तैनात मुख्य आरक्षी डॉ. ओमप्रकाश सिंह एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अंगदराम के सेवानिवृत्त...

लखनऊ में 7.5 लाख रुपये रिश्वत लेते एलडीए के अभियंता समेत तीन लोग रंगे हाथ गिरफ्तार

लखनऊ में 7.5 लाख रुपये रिश्वत लेते एलडीए के अभियंता समेत तीन लोग रंगे हाथ गिरफ्तार

by ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360
August 1, 2026
0

लखनऊ, उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान की टीम ने शनिवार को रिश्वतखोरी के एक मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के...

बलिया में पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म की कोशिश, आरोपी रिश्तेदार गिरफ्तार

भदोही जिले में नर्स से बलात्कार के मामले में अस्पताल संचालक और उसके बेटे पर मुकदमा

by ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360
August 1, 2026
0

भदोही जिले में एक आयुर्वेद अस्पताल एवं पंचकर्म केंद्र में एक नर्स से दुष्कर्म के मामले में चिकित्सालय के संचालक,...

भदोही: पुलिस अधिकारी बनकर ‘बरामद’ बेटी का मेडिकल परीक्षण कराने के नाम पर ठगे 12 हजार रुपये, मुकदमा दर्ज

राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद दवरा ‘चंदा चोरी’ का ‘नाटक’ करने पर मुकदमा दर्ज

by ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360
August 1, 2026
0

वाराणसी, दिल्ली में अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले की तरफ ध्यान खींचने के लिये संसद...

प्रधानमंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली लड़की ने माफी मांगी

प्रधानमंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली लड़की ने माफी मांगी

by ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360
August 1, 2026
0

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली लड़की ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर देशवासियों से सार्वजनिक...

हमारे बारे में Public News 360

एक विश्वसनीय न्यूज़ चैनल — पढ़ें ताज़ा समाचार, राजनीति, समाज और संस्कृति की खबरें।

संपादकीय जानकारी
प्रकाशक/संपादक:अतुल नारायण श्रीवास्तव
उप संपादक: अनुराग वर्मा
पता: फ़ैज़ाबाद-अयोध्या, उत्तर प्रदेश 224001
हमसे जुड़ें
विश्वसनीयता और पारदर्शिता के साथ।

All disputes Ayodhya jurisdiction only • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को संसूचित राजपत्र संख्या सी.जी.-डी.एल.-अ.-25022021-225464 दिनांक 25 फरवरी 2021 के भाग II द्वारा संचालित सर्वाधिकार सुरक्षित

  • About Us
  • Contact Us
  • Home

© 2025 publicnews360.in

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • होमपेज
  • अयोध्या
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • अंतराष्ट्रीय
  • खेल
  • राजनीति
  • क्राइम
  • व्यापार जगत

© 2025 publicnews360.in

×

No WhatsApp Number Found!

Join Our Whatsapp Group