लखनऊ, प्रदेश में ढाई लाख से अधिक ऐसे राशन कार्ड हैं, जिन पर निराश्रित महिला पेंशन योजना के तहत विधवा पेंशन ले रहीं महिलाओं के पतियों के नाम दर्ज हैं। शासन स्तर पर फैमिली आईडी का विभिन्न विभागों के डेटाबेस से आपस में मैच कराने पर यह चौकाने वाला खुलासा हुआ है।
इससे कई और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिसका जिक्र करते हुए श्रमायुक्त ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और जिला पूर्ति अधिकारियों को पत्र भेजा है। पत्र में इसका सत्यापन करवाकर नियमानुसार कार्यवाही किए जाने की बात कही गई है। जिस पर जिला पूर्ति अधिकारी दफ्तर के स्तर से कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
विधवा पेंशन ले रही महिलाओं के पतियों के नाम जिन राशनकार्डों पर दर्ज हैं उनकी संख्या दो लाख 50 हजार 678 हैं। इसी तरह प्रदेश में सर्वाधिक सात लाख 26 हजार 848 राशनकार्ड धारक ऐसे पाए गए हैं, जिनके परिवार का कोई न कोई सदस्य आयकर दे रहा है। यह लोग भी सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से राशन ले रहे हैं।
शासन स्तर पर हुए सत्यापन के दौरान एनआईसी से तीन लाख 12 हजार 374 ऐसे राशनकार्ड धारकों के बारे में जानकारी मिली है, जिनके परिवार के किसी सदस्य द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के अंतर्गत धान-गेहूं की बिक्री के लिए किए गए रजिस्ट्रेशन में खुद को दो हेक्टेयर (पांच एकड़) से अधिक भूमि का स्वामी बताया गया है।
श्रमायुक्त ने अपने पत्र में लिखा है कि एनआईसी की ओर से विभागीय पोर्टल के डीएसओ-पूर्ति निरीक्षक लॉगिंग पर उपरोक्त अपात्रों के साथ ही मृत राशनकार्ड धारकों की उचित दर दुकानवार सूची उपलब्ध कराई गई है। जिला पूर्ति अधिकारियों को इसका सत्यापन कर कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।


