नयी दिल्ली, सरकार ने जीएसटी नेटवर्क को पंजीकृत कारोबारों की सहमति पर उनके आंकड़े रिजर्व बैंक के ‘पब्लिक टेक प्लेटफॉर्म फॉर फ्रिक्शनलेस क्रेडिट’ के साथ साझा करने की अनुमति दे दी है।
इस कदम से कारोबारी इकाइयों को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) से संबंधित साझा जानकारी के आधार पर तेजी से कर्ज पाने में मदद मिलेगी।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की अनुषंगी इकाई ‘रिजर्व बैंक इनोवेशन हब’ ने इस मंच का गठन किया है। इसका उद्देश्य ऋण देने में मदद करने के लिए कर्जदाताओं को जरूरी जानकारी के निर्बाध प्रवाह को सक्षम बनाना है।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने एक अधिसूचना में कहा, ‘जीएसटी परिषद की अनुशंसा पर केंद्र सरकार ‘पब्लिक टेक प्लेटफॉर्म फॉर फ्रिक्शनलेस क्रेडिट’ को एक ऐसी प्रणाली के रूप में अधिसूचित करती है जिसके साथ जानकारी सहमति के आधार पर साझा की जा सकती है।’
इस मंच को कर्ज के एक बड़े परिवेश के संचालन के लिए विकसित किया गया है, ताकि आंकड़ों को लेकर विभिन्न स्रोतों से डिजिटल रूप से जानकारी तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
अधिसूचना के मुताबिक, वित्तीय सेवा प्रदाता और कई डेटा सेवा प्रदाता मानक और प्रोटोकॉल संचालित संरचना का इस्तेमाल कर मंच पर इकट्ठा हो सकते हैं।
मूर सिंघी फर्म के कार्यकारी निदेशक रजत मोहन ने कहा कि डेटा आपूर्तिकर्ता/ प्राप्तकर्ता से उचित सहमति लेकर जीएसटीएन को बाहरी कर रिटर्न, मासिक और वार्षिक कर रिटर्न और चालान तैयारियों के आंकड़ों के साथ जीएसटी पंजीकरण आवेदन में प्रस्तुत विशिष्ट विवरण का खुलासा करने का अधिकार है।
मोहन ने कहा, ‘इससे सुनिश्चित होता है कि कर्जदार ऋणदाताओं या सरकारी पोर्टल को प्रदान की गई किसी भी लेनदेन संबंधी जानकारी को छिपा नहीं सकते हैं। ऋणदाताओं को सीधे सरकार द्वारा स्वीकृत स्रोतों से प्रमाणित मासिक बिक्री एवं खरीद आंकड़ों तक पहुंच मिलती है जिससे ऋण जोखिम का अधिक सटीक और समय पर मूल्यांकन संभव हो पाता है।’
उन्होंने कहा कि भविष्य में क्रेडिट प्राप्त करने और सरकार प्रायोजित क्रेडिट कार्यक्रमों का लाभ उठाने के इच्छुक व्यवसायों के लिए जीएसटी फाइलिंग अब एक महत्वपूर्ण कारक बन जाएगी।


