उत्तराखंड के हल्द्वानी में एक ‘‘अवैध’’ मदरसे को तोड़े जाने के बाद आठ फरवरी को हुए दंगों की जांच मजिस्ट्रेट से कराने के शनिवार को आदेश दिए गए। हिंसाग्रस्त हल्द्वानी शहर के बाहरी इलाकों से कर्फ्यू हटा लिया गया है, लेकिन बनभूलपुरा क्षेत्र में यह लागू रहेगा।
बनभूलपुरा क्षेत्र में बृहस्पतिवार को एक ‘‘अवैध’’ मदरसे को तोड़े जाने को लेकर भीड़ ने आगजनी और तोड़फोड़ की थी। पुलिस ने कहा कि यहां निर्माण करने वाले अब्दुल मलिक की तलाश शुरू कर दी है।
पुलिस ने बताया कि सोशल मीडिया मंच के माध्यम से अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए शहर में इंटरनेट सेवाएं स्थगित रहीं। पुलिस ने प्रभावित इलाकों में गश्त की और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। दुकानें तथा स्कूल बंद रहे।
नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रह्लाद मीणा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हिंसा के संबंध में अब तक तीन प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं और पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
मीणा ने कहा, ‘‘पुलिस ने अब्दुल मलिक नामक एक आरोपी की तलाश शुरू कर दी है जिसने अब तोड़े जा चुके अवैध ढांचे का निर्माण कराया था और उसने तोड़फोड़ की कार्रवाई का कड़ा विरोध किया था।’’
पुलिस ने कहा कि दंगाइयों की पहचान करने के लिए बृहस्पतिवार की घटनाओं के सीसीटीवी फुटेज और वीडियो क्लिप का विश्लेषण किया जा रहा है।
एसएसपी ने कहा कि हल्द्वानी में आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिसकर्मियों पर हमला एक साजिश का हिस्सा था।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कुमाऊं के आयुक्त दीपक रावत मजिस्ट्रेटी जांच करेंगे और 15 दिन के भीतर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
नैनीताल की जिलाधिकारी वंदना सिंह ने शनिवार को कर्फ्यू बनभूलपुरा तक सीमित करने का आदेश जारी किया।
आदेश में कहा गया है कि कर्फ्यू अब समूचे बनभूलपुरा क्षेत्र तक सीमित रहेगा जिसमें आर्मी छावनी (वर्कशॉप लाइन समेत)-तिकोनिया-तीनपानी और गौलापार बाईपास की परिधि का क्षेत्र शामिल है।
इसमें कहा गया है कि नैनीताल-बरेली मोटर रोड पर वाहनों की आवाजाही और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों पर कोई पाबंदी नहीं रहेगी। हालांकि, उन इलाकों में केवल अस्पताल और दवा की दुकानें ही खुली रहेंगी, जहां कर्फ्यू लागू है।
शहर के बाहरी इलाके में दुकानें शनिवार को खुलीं, लेकिन स्कूल बंद रहे।
अधिकारियों के अनुसार, बृहस्पतिवार को हुई हिंसा में छह दंगाइयों की मौत हो गयी थी और 60 से अधिक लोग घायल हुए।
हिंसा में मारे गए लोगों के बारे में एसएसपी ने कहा कि पुलिस गोलीबारी में किसी की मौत नहीं हुई और पोस्टमॉर्टम से उनकी मौत की परिस्थितियां स्पष्ट हो जाएंगी।
उन्होंने कहा कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद पुलिस ने गोलीबारी की।
उन्होंने कहा, ‘‘गोलीबारी में किसी की मौत नहीं हुई क्योंकि गोलीबारी के बाद हमने पूरे इलाके की तलाशी ली थी और कोई शव नहीं मिला। अगले दिन अस्पतालों में शव पाए गए। पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच रिपोर्ट से स्पष्ट हो जाएगा कि किन परिस्थितियों में उनकी मौत हुई।’’
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी), कानून-व्यवस्था ए.पी. अंशुमन ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को बताया, ‘‘प्रभावित इलाके में लगातार गश्त की जा रही है और स्थिति नियंत्रण में है।’’
अंशुमन फिलहाल हल्द्वानी में डेरा डाले हुए हैं।
उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार की हिंसा में शामिल पांच लोगों को अभी तक गिरफ्तार किया गया है और तीन प्राथमिकियां दर्ज की गयी हैं।
एडीजी ने कहा कि तीन प्राथमिकियों में 16 लोगों को आरोपी बनाया गया है। उनमें से पांच को गिरफ्तार कर लिया गया है और शेष अन्य को भी जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।
एडीजी ने कहा कि बनभूलपुरा इलाके में कर्फ्यू अभी लागू है। उन्होंने कहा कि हालांकि, निवासियों को समय-समय पर आवश्यक सामान खरीदने की अनुमति दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि काठगोदाम तक रेल सेवाएं भी बहाल कर दी गयी हैं। उन्होंने बताया कि अभी कहीं से भी किसी और अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
स्थानीय लोगों ने नगर निगम कर्मियों और पुलिस पर पथराव किया और पेट्रोल बम फेंके थे, जिससे कई पुलिसकर्मियों को एक थाने में शरण लेनी पड़ी, जिसे भीड़ ने आग के हवाले कर दिया था।
एक पत्रकार समेत सात लोगों का शुक्रवार को तीन अस्पतालों में इलाज किया गया। उनमें से तीन की हालत गंभीर बतायी गयी थी।


