उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की 14 अक्टूबर को प्रस्तावित सुनवाई पर निगाहें टिकी हैं, लेकिन देर शाम तक अदालत की वेबसाइट पर इस सुनवाई से संबंधित कोई नया आदेश जारी दिखाई नहीं दिया। ऐसे में पंचायत चुनाव तीन महीने के भीतर कराने, ओबीसी आरक्षण और निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने को लेकर नए न्यायिक निर्देशों की स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है।
यह मामला दशरथ यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य से संबंधित है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने 9 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में ओबीसी आरक्षण के लिए गठित डेडिकेटेड कमीशन के कामकाज पर सवाल उठाते हुए आगरा जिले में जुटाए गए जातिवार आंकड़ों का विस्तृत ब्योरा मांगा था।
अदालत ने आयोग को रिपोर्ट 14 अक्टूबर तक पेश करने और इसी दिन दोपहर 12 बजे मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था।
9 अक्टूबर के आदेश में अदालत ने आयोग की ओर से दी गई जानकारी का उल्लेख किया था कि आंकड़े जुटाने का लगभग 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और 40 जिलों को इसमें शामिल किया गया है।
हालांकि, आगरा जिले का उदाहरण देते हुए अदालत ने कहा था कि तीन लाख से अधिक ओबीसी आबादी वाले जिले में आयोग की बैठकों में केवल 179 लोगों के पहुंचने की जानकारी दी गई, जबकि प्रश्नावलियां जारी होने के बावजूद 29 लोगों के बयान दर्ज किए गए।
अदालत ने आयोग से यह भी स्पष्ट करने को कहा था कि विभिन्न जातियों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का आकलन किस आधार पर किया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने आयोग से आगरा जिले में किए गए कार्यों, जातिवार आंकड़ों और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया का विवरण सीलबंद लिफाफे में मांगा था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के संबंधित फैसलों के अनुरूप आयोग की कार्यप्रणाली को स्पष्ट करने का निर्देश दिया था। इसी मामले में 14 अक्टूबर को आगे की सुनवाई निर्धारित थी।
हालांकि, 14 अक्टूबर की सुनवाई के बाद अदालत की वेबसाइट पर नया आदेश उपलब्ध नहीं होने के कारण फिलहाल यह पुष्टि नहीं की जा सकती कि कोर्ट ने पंचायत चुनाव तीन महीने में कराने, 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के प्रावधान या निवर्तमान ग्राम प्रधानों को चुनाव तक प्रशासक बनाए रखने के संबंध में कोई नया निर्देश दिया है। इन मुद्दों पर अदालत के रुख की स्पष्ट जानकारी के लिए नए आदेश का जारी होना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल पंचायत चुनाव से जुड़ी आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है। अदालत का नया आदेश वेबसाइट पर उपलब्ध होने के बाद ही सुनवाई में दिए गए निर्देशों और उनके प्रभाव को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
देखे, पूर्व का आदेश WRIC(A)_22590_2026