नई दिल्ली, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने ओडिशा तट के पास महानदी अपतटीय बेसिन में गहरे समुद्र के भीतर प्राकृतिक गैस मिलने की जानकारी दी है। कंपनी के मुताबिक, यह खोज ‘समुद्र मंथन’ के तहत चलाए जा रहे गहरे समुद्री अन्वेषण अभियान का हिस्सा है।
हालांकि, खोज को व्यावसायिक रूप से उपयोगी बनाने के लिए आगे विस्तृत मूल्यांकन और परीक्षण किए जाएंगे। भारत सरकार ने जुलाई 2026 में ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दी थी, जिसके पहले चरण के लिए 2030-31 तक 84,084 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
ONGC के अनुसार, महानदी अपतटीय बेसिन में एमएन-डीडब्ल्यू18-1-एच-डी कुएं में 18 सितंबर को गैस की मौजूदगी का पता चला। यह कुआं कोणार्क तट से करीब 43 किलोमीटर की दूरी पर बताया गया है। कंपनी के मुताबिक कुएं को 1,623 मीटर की लक्षित गहराई तक खोदा गया और करीब 1,441 से 1,452 मीटर की गहराई के बीच गैस मिली। कंपनी ने कहा है कि कुएं से गैस का प्रवाह और दबाव उत्साहजनक बना हुआ है।
महानदी बेसिन में ONGC का यह अभियान भारत के गहरे समुद्री ऊर्जा संसाधनों की खोज के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, महानदी देश के उन अपतटीय बेसिनों में शामिल है जहां गहरे समुद्र में हाइड्रोकार्बन संसाधनों की संभावनाएं मौजूद हैं।
जुलाई में इसी बेसिन में पहले मूल्यांकन कुएं की ड्रिलिंग शुरू की गई थी। सरकार के मुताबिक, इस अभियान में चार गहरे समुद्री कुओं के जरिए बेसिन की संभावनाओं का व्यवस्थित मूल्यांकन किया जाना है।
ONGC का कहना है कि ओडिशा के तट से अपेक्षाकृत कम दूरी पर होने के कारण यदि गैस का भंडार व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य पाया जाता है तो भविष्य में इसके विकास और उत्पादन को अपेक्षाकृत तेजी से आगे बढ़ाने की संभावना हो सकती है। हालांकि, किसी खोज को व्यावसायिक उत्पादन में बदलने से पहले गैस की मात्रा, गुणवत्ता, दबाव, उत्पादन क्षमता और आर्थिक व्यवहार्यता जैसे कई पहलुओं का विस्तृत परीक्षण जरूरी होता है।
केंद्र सरकार की ‘समुद्र मंथन’ योजना का उद्देश्य भारत के अपतटीय तेल और गैस संसाधनों की खोज को तेज करना है। योजना में गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में 60 अन्वेषण कुओं की ड्रिलिंग के लिए 43,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा साझा अपतटीय उत्पादन और निकासी बुनियादी ढांचे के लिए 10,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं। सरकार का अनुमान है कि योजना की सफलता से देश के हाइड्रोकार्बन भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट से अधिक की वृद्धि हो सकती है, हालांकि यह लक्ष्य अन्वेषण की सफलता पर निर्भर करेगा।
इस खोज के बाद अब ONGC के सामने अगला चरण गैस भंडार का विस्तृत मूल्यांकन और उसकी व्यावसायिक व्यवहार्यता तय करना होगा।