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चंद्रमा पर मिला कोलोसियम से भी बड़ा नया गड्ढा, 2024 में हुआ था शक्तिशाली टकराव; NASA ने खोजा ‘मैकगेटचिन क्रेटर’

ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360 by ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360
September 17, 2026
in Featured, अंतराष्ट्रीय
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वैज्ञानिकों ने चंद्रमा पर एक ऐसे नए गड्ढे की खोज की है जो रोम के कोलोसियम से भी बड़ा है। यह गड्ढा दो साल पहले हुई एक शक्तिशाली टक्कर के कारण बना था, लेकिन उस समय इसका पता नहीं चल पाया था।

करीब 728 फुट चौड़ा और 141 फुट तक गहरा यह गड्ढा हाल के समय में सौर मंडल में बना ज्ञात सबसे बड़ा प्रभाव-गड्ढा है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इतनी बड़ी टक्कर की घटना करीब 132 साल में एक बार होने का अनुमान है। नासा द्वारा चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों के लिए आधार बनाने की तैयारी के बीच यह घटना वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने का दुर्लभ अवसर है।

‘साइंस एडवांसेज’ पत्रिका में बुधवार को प्रकाशित दो अध्ययनों में से एक में वैज्ञानिकों ने कहा कि यह घटना ‘‘सांख्यिकीय रूप से दुर्लभ, लगभग जीवन में एक बार होने वाला अवलोकन’’ है।

नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (एलआरओ) ने मई 2024 में चंद्रमा के पृथ्वी की ओर वाले हिस्से में इस गड्ढे को देखा था। यह किसी क्षुद्रग्रह या धूमकेतु के टुकड़े के चंद्रमा से टकराने के बाद बना था। पृथ्वी और अंतरिक्ष में मौजूद दूरबीनें वास्तविक समय में इस टक्कर का पता नहीं लगा सकीं।

एलआरओ द्वारा ली गई चौड़े कोण की तस्वीरों में इस गड्ढे की पहचान बड़ी मात्रा में उपलब्ध आंकड़ों के बीच अगस्त 2025 में हुई। इसके बाद अंतरिक्ष यान ने पिछले वर्ष शरद ऋतु में इसकी विस्तृत तस्वीरें लीं और इस साल की शुरुआत में इसकी खोज की पुष्टि की गई।

इस गड्ढे का नाम दिवंगत थॉमस मैकगेटचिन के नाम पर रखा गया है, जो ह्यूस्टन स्थित लूनर एंड प्लैनेटरी इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक थे। यह एलआरओ द्वारा करीब एक दशक पहले खोजे गए पिछले रिकॉर्डधारी गड्ढे से तीन गुना बड़ा है।

प्राचीन काल से ही चंद्रमा की सतह पर ऐसे गड्ढों के निशान मौजूद हैं। चंद्रमा पर सौर मंडल के कुछ सबसे बड़े प्रभाव-गड्ढे हैं, जिनमें एक की चौड़ाई 2,400 किलोमीटर से अधिक है।

इस हालिया टक्कर से चंद्रमा की सतह 100 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में प्रभावित हुई। एलआरओ के कैमरों के मुख्य वैज्ञानिक और ‘इंट्यूटिव मशीन्स’ से जुड़े मार्क रॉबिन्सन के अनुसार, धूल और चट्टानी मिट्टी अपेक्षा से अधिक ऊंचे कोण पर दूर तक उछली।

रॉबिन्सन इस विषय पर प्रकाशित एक अध्ययन के प्रमुख लेखक हैं।

एक अलग अध्ययन में नए गड्ढे के आसपास करीब सात किलोमीटर चौड़ा ठंडा क्षेत्र पाया गया। यह चंद्रमा की ऊपरी मिट्टी के ढीले होने के अनुरूप है। अध्ययन के सह-लेखक और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिलिस के वैज्ञानिक डेविड पेज ने इसकी तुलना बागवानी से की।

पेज ने कहा कि वैज्ञानिक अब प्रभाव वाली घटनाओं को चंद्रमा की सतह पर मौजूद रेजोलिथ को ‘‘जोते जाने’’ के एक तरीके के रूप में देख रहे हैं। इससे मिट्टी व तलछट उलट-पुलट जाती है और आमतौर पर सतह के नीचे रहने वाली सामग्री ऊपर आ जाती है।

रॉबिन्सन के अनुसार, 2009 में एलआरओ के प्रक्षेपण के बाद से उसके द्वारा खोजे गए अनेक गड्ढों से पता चलता है कि चंद्रमा की ऊपरी करीब दो सेंटीमीटर मिट्टी हर 80,000 साल में बाहर से आए पदार्थ के कारण उलट-पुलट हो जाती है। यह पहले के अनुमान से अधिक तेज गति है।

अपोलो मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों के चंद्रमा पर छोड़े गए पैरों के निशान हमेशा बने रहने की लोकप्रिय धारणा के विपरीत, रॉबिन्सन ने कहा कि उस अवधि में वे ‘‘निश्चित रूप से मिट चुके होंगे।’’

उन्होंने कहा कि अगला कदम यह पता लगाना है कि ऐसे गड्ढों से बाहर निकली सामग्री के नासा के प्रस्तावित चंद्र आधार (मून बेस) से टकराने का कितना जोखिम है। उनके अनुसार, यह जानकारी इंजीनियरों को ऐसी संरचनाएं बनाने में मदद करेगी जिन्हें संभावित नुकसान से बचाने के लिए अधिक मजबूत बनाया जा सके।

Tags: McGetchin CraterMoon CraterNASAचंद्रमा
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