मोतीगंज/अयोध्या, हैरिग्टनगंज विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत लक्ष्मणपुर ग्रंट, जासरपुर, रामपुर और जोहन में छुट्टा मवेशियों का आतंक किसानों और राहगीरों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है।
शाम ढलते ही सड़कों पर मवेशियों के झुंड जमा हो जाते हैं और रात होते ही यही झुंड खेतों की ओर रुख कर लेते हैं। धान समेत अन्य फसलों को रौंदे जाने से किसान परेशान हैं, जबकि सड़कों पर बड़ी संख्या में मवेशियों की मौजूदगी से हादसे का खतरा भी बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में छुट्टा मवेशियों की समस्या को लेकर पहले भी आवाज उठाई गई थी। अखबार में खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद ब्लॉक प्रशासन हरकत में आया, लेकिन ग्रामीणों ने कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
बताया जा रहा है कि रामपुर ग्राम पंचायत के सचिव अतुल वर्मा और लक्ष्मणपुर ग्रंट के सचिव भूपेंद्र तिवारी करीब पांच से सात सफाईकर्मियों के साथ छुट्टा मवेशियों को पकड़ने के लिए गांव पहुंचे थे। ग्रामीणों का आरोप है कि टीम ने कुछ समय तक क्षेत्र का भ्रमण किया, तस्वीरें खिंचवाईं और कार्रवाई की जानकारी अधिकारियों को भेजने के बाद लौट गई।
ग्रामीणों का कहना है कि अभियान के दौरान मवेशियों को पकड़कर गौशाला भेजने की प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि छुट्टा मवेशी सड़कों और खेतों में पहले की तरह घूम रहे हैं तो कार्रवाई का असर धरातल पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा है।
क्षेत्र में ग्राम पंचायत जोहान की गौशाला को लेकर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, यहां पहले करीब 35 छुट्टा मवेशी रखे गए थे, लेकिन बीते 30 जून को उन्हें किसी अन्य गौशाला में भेज दिया गया। इसके बाद से गौशाला खाली पड़ी होने की बात कही जा रही है।
दूसरी ओर आसपास के गांवों में छुट्टा मवेशियों की संख्या बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब क्षेत्र में गौशाला की व्यवस्था मौजूद है तो उसे खाली रखने के बजाय सड़कों और खेतों में घूम रहे मवेशियों को वहां रखा जाना चाहिए।
लक्ष्मणपुर ग्रंट-जासरपुर क्षेत्र के पांडेय का पुरवा में रात के समय सड़क पर बड़ी संख्या में छुट्टा मवेशियों के जमा होने की शिकायत है। ग्रामीणों के अनुसार, शाम होते ही मवेशियों के झुंड सड़क पर फैल जाते हैं, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
रात के अंधेरे में सड़क पर अचानक मवेशियों के सामने आ जाने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार राहगीरों को मवेशियों के झुंड के बीच से बेहद सावधानी से निकलना पड़ता है।
ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क पर जमा रहने के बाद रात में यही छुट्टा मवेशी किसानों के खेतों में पहुंच जाते हैं। धान समेत अन्य खड़ी फसलों को रौंदने और नुकसान पहुंचाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
फसल बचाने के लिए कई किसान लाठी लेकर रातभर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि दिनभर खेती-किसानी के काम के बाद रात में भी खेतों की निगरानी करनी पड़ रही है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है।
बरसात के मौसम में किसानों के सामने केवल फसल बचाने की चुनौती नहीं है, बल्कि खेतों में रात बिताना उनकी सुरक्षा के लिए भी जोखिम भरा साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बढ़ जाता है।
इसके बावजूद किसान अपनी फसल बचाने के लिए रातभर खेतों में रहने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर भारी खर्च करने के बाद तैयार हो रही फसल को छुट्टा मवेशियों से बचाना अब उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में प्रभावी अभियान चलाकर छुट्टा मवेशियों को तत्काल पकड़ा जाए और उन्हें गौशालाओं में भेजा जाए। साथ ही खाली पड़ी गौशाला का उपयोग करने और केवल कागजी कार्रवाई के बजाय धरातल पर ठोस व्यवस्था करने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो एक ओर किसानों की फसल बर्बाद होती रहेगी, वहीं दूसरी ओर सड़कों पर मवेशियों के झुंड के कारण किसी बड़े हादसे की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।









