आज से सावन (श्रावण) मास की शुरुआत हो चुकी है। यह पवित्र महीना केवल भगवान शिव की पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि शनिदेव की वक्र दृष्टि एवं शनि दोषों (विशेषकर साढ़ेसाती और ढैय्या) के निवारण के लिए भी अत्यंत सिद्ध समय माना गया है।
अगर आप सावन में भोलेनाथ की भक्ति के साथ-साथ शनि देव से जुड़े उपाय करते हैं तो शनिदेव की टेढ़ी नज़र का असर कम होता है और घर में खुशियों के साथ सुख, शांति और समृद्धि आती है।
अगर आप भी इस समय शनि की महादशा से परेशान हैं, तो सावन का यह पवित्र महीना आपके लिए एक चमत्कारी वरदान साबित हो सकता है। लेकिन, उपायों को जानने से पहले, आइये आसान शब्दों में समझते हैं कि आख़िर यह साढ़ेसाती और ढ़ैय्या होती क्या है?
साढ़ेसाती और ढैय्या क्या है?
साढ़ेसाती: शनि साढ़ेसाती वह अवधि होती है जब शनि ग्रह, व्यक्ति की जन्म राशि के ठीक एक घर पहले बारहवें (12वें), उसी राशि में पहले (1ले) और दूसरे (2सरे) भाव में कदम रखते हैं, तो उसे साढ़ेसाती कहते हैं। चूँकि शनि एक राशि में ढ़ाई साल रहते हैं, इसलिए इन तीन घरों को पार करने में उन्हें साढ़े सात साल का समय लगता है। इस दौरान व्यक्ति को जीवन में कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, कामों में देरी होती है और साथ ही कई कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
ढैय्या: वहीं ढैय्या तब लगती है जब शनि ग्रह राशि में चौथे (4थे) या आठवें (8वें) भाव में आता है और करीब ढाई सालों तक अपना प्रभाव दिखाता है। वर्तमान स्थिति की बात करें तो (वर्ष 2026) में शनि देव, मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। आइये जानते हैं कि इस समय किन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती का साया है और किन सरल और अचूक उपायों से इसका प्रभाव कम हो सकता है?
वर्तमान में, इन राशियों पर चल रही है शनि की साढ़ेसाती!
मेष: मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण जारी है।
मीन: मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा (मध्य) चरण जारी है, जिसे सबसे अधिक प्रभावकारी माना जाता है।
कुम्भ: कुम्भ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम यानी तीसरा चरण जारी है।
सावन में शनि दोष निवारण का आसान एवं अचूक उपाय!
भगवान शिव की पूजा और बेलपत्र अर्पण!
सावन में प्रतिदिन या कम से कम हर सोमवार को शिवजी को बेलपत्र, जल, दूध, घी, शहद और गंगाजल अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें। भगवान शिव शनिदेव के गुरु हैं, इसलिए भोलेनाथ की आराधना करने से शनि का प्रकोप बहुत जल्दी शांत होता है।।
पीपल के वृक्ष के नीचे दीया जलाएँ
सावन के हर शनिवार को शाम के समय (सूर्यास्त के बाद) पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का (चौमुखा) चार बत्तियों वाला दीपक जलाएं। दीपक में थोड़े काले तिल और लोहे की कील जरूर डालें, फिर पेड़ के सात चक्कर लगाएं।
हनुमान जी की विशेष पूजा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी शनिदेव के मित्र हैं। अतः सावन में नियमित रूप से हनुमान चालीसा अथवा बजरंग बाण का पाठ करने से शनिदेव का प्रकोप शांत रहता है। शनिवार के दिन पवनपुत्र हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाना भी बहुत फायदेमंद होता है।
छाया दान
शनिवार की सुबह एक मिट्टी या लोहे के कटोरे में सरसों का तेल लें और उसमें अपना चेहरा (छाया) देखें। इसके बाद उस तेल को किसी गरीब या ज़रूरतमंद को दान कर दें या पास के शनि मंदिर में रख आएं, ज्योतिष शास्त्र में इसे ‘छाया दान’ कहा जाता है। यह साढ़ेसाती और ढैय्या के बुरे प्रभावों को कम करने का सबसे अचूक और प्रभावी उपाय है।
मंत्र जाप: सावन में नियमित रूप से मन्त्रों का जाप करना बहुत लाभकारी है।
ॐ नमः शिवाय (शिव मंत्र) – 108 बार।
ॐ शं शनैश्चराय नमः या ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः – शनि मंत्र।
शनि देव हमारे कर्मों के अनुसार फल देते हैं। इसलिए सावन के पावन महीने में काले तिल, काली उड़द, छाता, जूते और काले कपड़ों का दान किसी गरीब या ज़रूरतमंद व्यक्ति को ज़रूर करें। इसके साथ ही इस बात का खास ध्यान रखें कि कभी भी किसी बुजुर्ग या असहाय व्यक्ति का दिल न दुखाएं और न ही उनका अपमान करें।
उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है।









