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अमेरिका में सोशल मीडिया लत से जुड़े मुकदमे में मेटा और गूगल को मिली हार, जानकारों ने बताए फैसले के प्रभाव

ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360 by ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360
March 27, 2026
in Featured, अंतराष्ट्रीय
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मेटा-व्हाट्सऐप गोपनीयता नीति; CCI का 213.14 करोड़ रुपये जुर्माना, सुनवाई 23 फरवरी को

अमेरिका में एक जूरी ने फैसला दिया है कि इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के डिजाइन में ऐसी खामियां हैं, जिसकी वजह से इनकी लत लग जाती है।

लॉस एंजिलिस की जूरी ने इस बड़े मामले में लगभग नौ दिन में फैसला सुनाया। यह मुकदमा केजीएम नामक एक युवती ने सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ दायर किया था।

जूरी ने 30 लाख डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया, जिसमें मेटा (इंस्टाग्राम की मालिक) को 70 प्रतिशत और गूगल (यूट्यूब की मालिक) को 30 प्रतिशत हिस्सा देना होगा। बाद में 30 लाख डॉलर का दंडात्मक जुर्माना भी लगाया गया।

टिकटॉक और स्नैप ने मुकदमा शुरू होने से पहले ही गुप्त समझौता कर लिया था।

यह इस हफ्ते अमेरिकी अदालत में मेटा की दूसरी बड़ी हार है। 24 मार्च को न्यू मेक्सिको की जूरी ने भी कंपनी को बच्चों के यौन शोषण के खतरे और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर होने वाले असर की जानकारी छिपाने का दोषी पाया था।

केजीएम का यह पहला ऐसा मामला है, लेकिन आखिरी नहीं। ऐसे 20 से ज्यादा मामले जल्द अदालत में पेश किए जाने हैं, जिनसे आगे के मामलों का रास्ता तय होगा।

इस फैसले के दूरगामी असर हो सकते हैं। बड़ी टेक कंपनियों के लिए यह फैसला वैसा ही साबित हो सकता है, जैसा कभी तंबाकू कंपनियों के लिए हुआ था। इसी तरह के हजारों मामले कतार में हैं।

लत लगाने वाली मशीनें-

केजीएम (अब 20 वर्षीय) ने कहा कि उसने छह साल की उम्र में यूट्यूब और नौ साल की उम्र में इंस्टाग्राम का इस्तेमाल शुरू किया था। धीरे-धीरे उसे इनकी आदत लग गई और वह एक दिन में 16 घंटे तक इंस्टाग्राम इस्तेमाल करने लगी।

उन्होंने कहा कि इन प्लेटफॉर्म के फीचर (जैसे “इन्फिनिट स्क्रॉल”) उसे बार-बार इस्तेमाल करने के लिए मजबूर करते थे। इससे उसे तनाव, अवसाद, अपने शरीर की बनावट को लेकर हीनता की भावना और आत्महत्या जैसे विचार आने लगे।

केजीएम ने कहा कि मेटा और यूट्यूब ने जानबूझकर ऐसे डिजाइन बनाए ताकि बच्चे ज्यादा समय तक इनका इस्तेमाल करें और कंपनी को ज्यादा मुनाफा हो।

आरोप है कि कंपनियों ने जुआ और सिगरेट उद्योग की तकनीकों का इस्तेमाल किया, ताकि लोग ज्यादा जुड़े रहें और विज्ञापन से ज्यादा पैसा कमाया जा सके।

केजीएम के वकील मार्क लेनियर ने जूरी से कहा कि इन कंपनियों ने ऐसी मशीनें बनाईं, ताकि बच्चों के दिमाग को इनका आदी बनाया जा सके और उन्होंने ऐसा जानबूझकर किया।

उन्होंने मेटा के एक आंतरिक अध्ययन “प्रोजेक्ट मिस्ट” का जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर पाया गया कि जिन बच्चों ने ‘प्रतिकूल प्रभावों’ का अनुभव किया था, उनके इंस्टाग्राम के आदी होने की संभावना सबसे अधिक थी, और माता-पिता इस लत को रोकने में खुद को असहाय महसूस कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि जब केजीएम इस चंगुल में फंस गई, तब उसकी मां उसे रोक नहीं पाई।

जूरी को बताया गया कि मेटा में कंपनी के लोग खुद इसकी तुलना ड्रग्स और जुए से करते थे। यूट्यूब के एक दस्तावेज में “दर्शक को आदी बनाना” लक्ष्य बताया गया था, और इंस्टाग्राम के एक कर्मचारी ने लिखा कि कंपनी में काम करने वाले लोग ‘असल में नशे के सौदागर’ जैसे हैं।

— कंपनियों का जवाब–

मेटा ने कहा कि केजीएम को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से पहले ही कई दिक्कतें थीं, इसलिए उसकी सारी परेशानी के लिए सिर्फ सोशल मीडिया को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने बचाव पक्ष की ओर से गवाही देते हुए कहा, ‘मैं इस बात की कोशिश नहीं कर रहा हूँ कि लोग हर महीने (प्लेटफॉर्म पर) बिताए जाने वाले समय को अधिकतम करें।’

हाल के वर्षों में मेटा द्वारा जोड़े गए सुरक्षा उपकरणों पर जुकरबर्ग ने कहा, ‘मेरी हमेशा यही इच्छा रही है कि काश हम इन सुरक्षा उपायों को और पहले लागू कर पाते।’’

यूट्यूब के वकील ने कहा कि केजीएम के मेडिकल रिकॉर्ड में यूट्यूब की लत का कोई जिक्र नहीं है।

कंपनियों ने अपने बचाव का एक बड़ा हिस्सा ‘धारा 230′ के तहत संरक्षण पर केंद्रित किया। उन्होंने यह तर्क दिया कि उनके प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की गई सामग्री के लिए उन्हें उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।’

हालांकि, न्यायाधीश ने जूरी को निर्देश दिया कि सामग्री क्या है और उस सामग्री को परोसने का तरीका क्या है—ये दोनों अलग-अलग बातें हैं। इस निर्देश ने मेटा और गूगल की धारा 230 के संरक्षण पर निर्भर रहने की क्षमता को सीमित कर दिया।

— कानून से जुड़ा मुद्दा–

यह बड़ी टेक कंपनियों के खिलाफ ऐसा पहला मामला है, जिसमें जूरी ने फैसला दिया है। पहले कंपनियां ऐसे मामलों से बच जाती थीं।

उदाहरण के लिए, जून 2024 में, गूगल की विज्ञापन प्रौद्योगिकी के एकाधिकार को लेकर न्याय विभाग की चुनौती पर निर्धारित जूरी की सुनवाई से कुछ महीने पहले, गूगल ने न्याय विभाग को 20 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक का भुगतान किया।’

यह राशि दावा किए गए हर्जाने से तीन गुना अधिक थी, जिसमें ब्याज भी शामिल था।

अमेरिका में, जूरी द्वारा सुनवाई केवल तभी आवश्यक होती है, जब मौद्रिक हर्जाने का मामला दांव पर हो। उस मामले में हर्जाने की पूरी राशि का अग्रिम भुगतान करके, गूगल ने हर्जाने के दावे को ही समाप्त कर दिया और इसके साथ ही, जूरी द्वारा सुनवाई के अधिकार को भी खत्म कर दिया।

अब तक अमेरिकी अदालतें डिजाइन (जैसे इन्फिनिट स्क्रॉल, नोटिफिकेशन) पर आधारित दावों को ज्यादा महत्व नहीं देती थीं। इस फैसले से यह साफ हुआ कि “सेक्शन 230” की सुरक्षा हर मामले में काम नहीं करेगी।

— आगे क्या होगा–

यह दुनिया का पहला बड़ा मामला है, जिसमें सोशल मीडिया की लत को नुकसान का कारण माना गया है। न्यू मेक्सिको वाले एक और मामले में, जूरी ने पाया कि मेटा ने गलत जानकारी दी और बच्चों की कमजोरी का फायदा उठाया। इस पर 37.5 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया गया।

केजीएम का यह मामला आगे आने वाले कई मामलों के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।

संभावना है कि अमेरिका में ऐसे मामलों पर एकसाथ सुनवाई हो। यह फैसला दुनिया भर में और भी मामलों का आधार बन सकता है।

मेटा और गूगल ने कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे।

(द कन्वरसेशन)

Tags: अमेरिका में सोशल मीडिया लत
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