नयी दिल्ली, सैन्य नर्सिंग सेवा (एमएनएस) अधिकारियों को अन्य सशस्त्र बल के पूर्व सैनिकों के समान पुनर्नियुक्ति लाभ मिलने का अधिकार है या नहीं, इस अस्पष्टता को दूर करने के प्रयास में, सरकार ने पूर्व सैनिक (केंद्रीय सिविल सेवा और पदों पर पुनर्नियोजन) संशोधन नियमावली-2026 को अधिसूचित किया है। रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी दी है।
सैन्य नर्सिंग सेवा के अधिकारी कमीशन प्राप्त अधिकारी होते हैं। यह संशोधन नौ फरवरी को अधिसूचित होने के साथ ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत पूर्व सैनिक (केंद्रीय सिविल सेवाओं और पदों पर पुनर्नियोजन) संशोधन नियमावली 2026 को अधिसूचित कर दिया है।’’
मंत्रालय के अनुसार, ‘‘मुख्य बदलाव नियम दो(सी)(आई) को संशोधित करता है, ताकि केंद्रीय सिविल सेवाओं में पूर्व सैनिकों के पुनर्नियोजन की परिभाषा के तहत भारतीय संघ की नियमित सेना, नौसेना या वायुसेना में लड़ाकू या गैर-लड़ाकू, किसी भी रैंक में सेवा कर चुके कर्मियों के साथ-साथ सैन्य नर्सिंग सेवा (एमएनएस) को स्पष्ट रूप से शामिल किया जा सके।’’
अधिकारियों ने कहा कि इस कदम से इस बात को लेकर पहले की अस्पष्टता दूर हो गई है कि क्या कमीशन प्राप्त एमएनएस अधिकारी अन्य पूर्व सैनिकों के समान पुन: रोजगार लाभों के हकदार हैं या नहीं।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘संशोधन औपचारिक रूप से पुनर्नियोजन नियमों के तहत एमएनएस कर्मियों को मान्यता देता है, और पूर्व रक्षा कर्मियों के एक व्यापक वर्ग के लिए पुनर्वास और पुनर्नियोजन के अवसरों को मजबूत करता है।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि नियम-दो के खंड-सी के संशोधन के तहत, ‘पूर्व सैनिकों’ की परिभाषा के तहत अब स्पष्ट रूप से ‘भारतीय संघ की सैन्य नर्सिंग सेवा (एमएनएस)’ को नियमित सेना, नौसेना और वायुसेना के साथ शामिल किया गया है।
इसमें कहा गया है, ‘‘यह नियम किसी भी रैंक में सेवा कर चुके किसी भी व्यक्ति पर लागू होता है, चाहे वह लड़ाकू हो या गैर-लड़ाकू।’’




