प्रयागराज, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति से जुड़े एक मामले में राज्य सरकार की अपील स्वीकार करते हुए एकल न्यायाधीश के 18 अप्रैल 2025 के निर्णय के क्रियान्वयन पर फिलहाल के लिए अंतरिम रोक लगा दी है।
खंडपीठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति अरुण कुमार ने अपील दायर करने में हुई देरी को क्षमा करते हुए राज्य सरकार की याचिका को स्वीकार कर लिया और अगली सुनवाई छह अक्टूबर से प्रारंभ हो रहे सप्ताह में करने का निर्णय किया।
राज्य सरकार की ओर से पेश मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने दलील दी कि अनुकंपा नियुक्ति की पूर्व शर्तों में यह स्पष्ट है कि मृतक कर्मचारी की पत्नी पहले से नौकरी में न हो। इस मामले में कर्मचारी की मृत्यु के समय उसकी पत्नी एक सहायक अध्यापिका के पद पर कार्यरत थीं, इसके बावजूद पुत्र राहुल ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन कर दिया।
अधिवक्ता ने यह भी कहा कि नियम 6 के अंतर्गत, आवेदक को परिवार की वित्तीय स्थिति का खुलासा करना आवश्यक है, इसलिए यह प्रतिवादी की जिम्मेदारी थी कि वह अपनी मां की नौकरी और आय के बारे में सही जानकारी देता।
इसके अतिरिक्त, अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि प्रतिवादी की मां ने 29 जुलाई 2008 को दायर किए हलफनामे में कहा था कि यदि उनके बेटे को नौकरी दी जाती है तो वह पूरे परिवार की देखभाल करेगा। हालांकि, उस हलफनामे में भी मां की नौकरी का कोई उल्लेख नहीं था।
अदालत ने 10 सितंबर को अपने आदेश में कहा, ‘‘इस मामले में विचार की आवश्यकता है। यह अपील स्वीकार की जाती है। एकल न्यायाधीश के 18 अप्रैल 2025 के उस निर्णय के लागू होने पर रोक रहेगी।


