अहमदाबाद के चंडोला तालाब क्षेत्र में मंगलवार से बांग्लादेशी घुसपैठियों के अवैध निर्माण पर बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है। गुजरात पुलिस ने सोमवार रात से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। यहां 50 बुलडोजर और 36 डंपर लगाए गए हैं।
अब तक की 2000 वर्ग गज यानी 18 हजार वर्ग फुट में फैले क्षेत्र के अतिक्रमण को साफ किया जा चुका है। पुलिस, क्राइम ब्रांच, एसओजी, साइबर क्राइम और एसआरपी की टीमें इलाके में तैनात हैं।
गुजरात हाईकोर्ट ने स्टे की याचिका खारिज की हाईकोर्ट में इस मेगा डिमॉलिशन पर स्टे लगाने की याचिका दाखिल की गई थी। लेकिन, इस याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। यहां रहने वाले लोगों ने याचिका में कहा था कि कानूनी प्रक्रिया और नियमों का पालन किए बिना तोड़फोड़ की जा रही है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया था कि यहां रहने वालों के बांग्लादेशी होने के ठोस सबूत नहीं हैं।
सरकार ने कहा- 4 बांग्लादेशी अलकायदा से जुड़े हाईकोर्ट में सुबह 11 बजे से 12.30 बजे तक चली सुनवाई के दौरान सरकार ने भी अपना पक्ष रखा। सरकारी वकील ने कोर्ट से कहा कि देश की सुरक्षा के लिहाज से यह कार्रवाई जरूरी है। यहां रहने वाले चार बांग्लादेशियों के अलकायदा से जुड़े होने का भी खुलासा हुआ है। राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जांच एजेंसी ने इनसे जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है।
इसके अलावा यहां रहने वाले लोग लोग चोरी-डकैती, ड्रग्स स्मगलिंग से जुड़े हुए हैं। ज्यादातर महिलाएं वेश्यावृत्ति में लिप्त हैं और बच्चों को भी वेश्यावृत्ति में धकेला जा रहा है। चंदोला झील के आसपास बनी इन बस्तियों में रहने वाले सैकड़ों बांग्लादेशियों ने नकली दस्तावेज बनवा रखे हैं। कागजातों की जांच कर इन्हें डिपोर्ट करने की कार्रवाई की जा रही है।
इलाके से 890 संदिग्ध बांग्लादेशियों को हिरासत में लिया गया पुलिस ने बीते दो दिन में इस इलाके से 890 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इनमें से 143 लोगों की पहचान बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में हुई है। यह कार्रवाई पहलगाम हमले के बाद शुरू की गई है। हिरासत में लिए गए लोगों को क्राइम ब्रांच के ऑफिस लाया गया है। जांच में कईयों के पास से फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड जब्त किए गए हैं। चौंकाने वाली बात तो यह है कि इनमें से कई बिना अटके गुजराती भी बोलते हैं।
अहमदाबाद में दाणीलीमडा रोड पर स्थित चंदोला झील और उसके आसपास के क्षेत्र को मिनी बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है। यह क्षेत्र 1200 हेक्टेयर में फैला हुआ है। यह पूरा इलाका आपराधिक गतिविधियों के लिए भी बदनाम है। जब भास्कर की टीम यहां पहुंची तो देखा कि सभी छोटी और संकरी गलियां गंदगी से पटी पड़ी थीं।
कुछ गलियां तो इतनी संकरी थीं कि वहां से साइकिल भी नहीं गुजर सकती थी। भास्कर की टीम एक स्थानीय नेता की मदद से पैदल बंगालीवास पहुंची। यह वही बंगाली बस्ती है जहां पश्चिम बंगाल से आए मुसलमान सालों से रह रहे हैं। इन बांग्लादेशी घुसपैठियों के चलते यहां के आस-पास रह रहने भारतीय मुसलमानों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
पुलिस जांच में पता चला है कि मूल रूप से अजमेर का रहने वाला लल्ला बिहारी ही पैसे लेकर यहां अवैध बांग्लादेशियों को बसाता था। लल्ला बिहारी यहां शेड वाले छोटे कमरे, दुकानें और गोदाम बनवाकर उन्हें किराए पर देता था। वह बांग्लादेशियों के लिए छोटे-मोटे काम धंधे का इंतजाम भी करता था। इसके लिए उसने बाकायदा एक पैकेज बना रखा था। परिवारों को बसाने के लिए तो वह 10 से 12 लाख रुपए तक लेता था। इस पैकेज के तहत वह बांग्लादेशियों के लिए रहने से लेकर उनके फर्जी डॉक्यूमेंट्स भी तैयार करवाता था।
2000 गज के फार्महाउस को देख चौंके कमिश्नर कार्रवाई के लिए पहुंचे पुलिस कमिश्नर एक जगह आकर चौंक गए, जब उन्होंने झुग्गियों के बीच 2000 वर्ग गज में फैला एक शानदार फार्महाउस देखा। यह आलीशान फार्महाउस लल्ला बिहारी का था। हालांकि, बीते शनिवार से शुरू हुई बांग्लादेशियों के पकड़ने की मुहिम से पहले ही फरार हो गया, जिसे अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने आज गिरफ्तार कर लिया।


