नई दिल्ली, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने शुक्रवार को ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की जोरदार वकालत की।
नई दिल्ली में आयोजित BRICS बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सदस्य देशों को व्यापार, निवेश और संयुक्त वित्तपोषण के क्षेत्र में अधिक मजबूत और एकीकृत नेटवर्क तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
पेजेश्कियान ने कहा कि राष्ट्रीय मुद्राओं में अधिक व्यापार और आपसी भुगतान की बेहतर व्यवस्था से मुद्रा जोखिम कम किया जा सकता है और ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बाहरी राजनीतिक और आर्थिक झटकों के प्रति अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि व्यापारिक साझेदारों, वित्तपोषण के स्रोतों और भुगतान माध्यमों में विविधता लाना आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी है।
ईरानी राष्ट्रपति ने ईरान की भौगोलिक स्थिति और ऊर्जा संसाधनों को ब्रिक्स की आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनका देश ऊर्जा, खाद्य और परिवहन संपर्क के क्षेत्र में रणनीतिक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण, नियामकीय बाधाओं को कम करने और सीमापार बाजारों को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
उन्होंने BRICS के नव विकास बैंक को सदस्य देशों की बुनियादी ढांचा और ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण का प्रमुख माध्यम बनाने की अपील की। पेजेश्कियान ने स्थानीय मुद्राओं में ऋण, निजी निवेश आकर्षित करने के लिए गारंटी व्यवस्था और बड़ी बुनियादी ढांचा एवं ऊर्जा परियोजनाओं के बीमा के लिए करीब 10 अरब डॉलर की शुरुआती पूंजी वाली संयुक्त पुनर्बीमा कंपनी बनाने का प्रस्ताव भी रखा।
पेजेश्कियान ने कहा कि मौजूदा वैश्विक वित्तीय व्यवस्था सीमित संख्या की मुद्राओं पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे वह राजनीतिक दबावों और वैश्विक संकटों के प्रति संवेदनशील हो जाती है। उन्होंने BRICS से आर्थिक सहयोग को केवल बैठकों और घोषणाओं तक सीमित न रखकर वास्तविक निवेश, कारखानों, बंदरगाहों और आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा आर्थिक सुरक्षा के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। ईरान अपनी ऊर्जा क्षमता और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति के जरिए BRICS की आर्थिक संपर्क व्यवस्था में महत्वपूर्ण कड़ी बनने के लिए तैयार है।
भारत की अध्यक्षता में हो रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में 11 सदस्य देश शामिल हैं। समूह अब वैश्विक आबादी के करीब 49.5 प्रतिशत, वैश्विक GDP के लगभग 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के करीब 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है। सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा।