सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दो महिला सिविल जजों की बर्खास्तगी को अवैध करार देते हुए उसे रद्द कर दिया है। जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने इस फैसले को “मनमाना, संवेदनहीन और गैरकानूनी” बताया और दोनों महिला जजों को 15 दिन के भीतर सरकारी सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया।
साल 2023 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खराब प्रदर्शन के आधार पर दो महिला जजों, अदिति शर्मा और सरिता चौधरी, की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। इसके खिलाफ दोनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर विचार करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुना दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि प्रोबेशन के दौरान एक महिला जज को अबॉर्शन की समस्या से गुजरना पड़ा था, साथ ही वह कोरोना वायरस से भी संक्रमित हुई थीं। इन परिस्थितियों को नजरअंदाज करते हुए उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) डाउनग्रेड कर दी गई थी।
कोर्ट ने कहा कि महिलाओं के प्रदर्शन का आंकलन करते समय उनके सामने आने वाली विशेष चुनौतियों को संवेदनशीलता से समझना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने कार्यस्थलों पर महिलाओं के प्रति अधिक संवेदनशील रवैया अपनाने की आवश्यकता बताई।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाएं हर महीने कुछ दिनों तक शारीरिक परेशानियों से गुजरती हैं, फिर भी वे दर्द निवारक दवाएं लेकर अपने कार्यों को पूरा करती हैं।


