अयोध्या, जिलाधिकारी नितीश कुमार से बृहस्पतिवार रात हॉट-टॉक हो गई। इसके बाद डीएम ने तत्काल राजू दास की सुरक्षा में तैनात गनर को वापस ले लिया। राजू दास का कहना है कि गनर हटाकर उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया है। यदि कोई घटना होती है तो पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
राजू दास ने बताया कि बृहस्पतिवार रात 11 बजे सरयू अतिथि गृह में भाजपा की हार की समीक्षा के लिए भाजपा के विधायक, मेयर और पदाधिकारी जुटे थे।
दरअसल, गुरुवार रात 11 बजे सरयू अतिथि भवन में हार की समीक्षा के विधायक, मेयर और भाजपा के पदाधिकारी मौजूद थे। योगी कैबिनेट के मंत्री सूर्य प्रताप शाही और जयवीर सिंह भी वहां मौजूद थे। अपना फीडबैक देने पुजारी राजू दास भी वहां पहुंचे।
इस बैठक में प्रदेश सरकार के दो मंत्री भी मौजूद रहे। साथ ही डीएम नितीश कुमार और एसएसपी राजकरण नैय्यर भी बैठक में शामिल थे।
इसी बीच राजू दास भी समीक्षा बैठक में अपना फीडबैक देने पहुंचे। राजू दास ने जब अफसरों की शिकायत शुरू की तो कथित तौर पर डीएम नाराज हो गए। इसके बाद राजू दास से डीएम नितीश कुमार की बहस हो गई। डीएम ने उनके पास बैठने से इन्कार कर दिया।
राजू दास का आरोप है कि उनके पास मौजूद एक मात्र गनर को बैठक स्थल से ही वापस बुला लिया गया।
मीडिया से बात करते हुए राजू दास ने एक इंटरव्यू में अयोध्या की हार के पीछे प्रशासनिक अफसरों को दोषी करार दिया था।
घेराबंदी करते हुए उन्होंने अफसरों को अपशब्द कहे। यह वीडियो वायरल होने के बाद डीएम और एसएसपी अयोध्या नाराज चल रहे थे।
इससे पहले भी भाजपा की हार के बाद राजूदास ने एक वीडियो जारी कर जिले के अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाई थी। इसको लेकर अफसर पहले से ही उनसे नाराज थे।
राजूदास के पास तीन गनर थे। दो लोकसभा चुनाव के बाद हटा लिए गए थे। एक मात्र बचा गनर भी बृहस्पतिवार की रात हटा लिया गया।
उन्होंने कहा कि वे मोदी के सिपाही हैं लोगों को बुरा लगता है। योगी जी के लिए काम करते हैं तो लोगों को बुरा लगता है। यदि अयोध्या की पीड़ा हम अधिकारी से कहें तो वे बुरा मान जाएं, यह लोकतंत्र में नहीं होता है।
अधिकारी शिकायत करने की बात को बुरा मान गए और मेरा गनर हटा दिया। हम जनता की आवाज हैं, यह आवाज बंद नहीं होगी।