चेन्नई, पिछले लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी को सहर्ष प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार स्वीकार करने और पांच साल बाद उनके खिलाफ आक्रामक रुख प्रदर्शित करने वाले तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ई.के. पलानीस्वामी अपनी पार्टी ‘ऑल इंडिया अन्नाद्रमुक मुनेत्र कषगम’ (एआईडीएमके) को जीत दिलाने में कामयाब होते नहीं दिख रहे हैं।
निर्वाचन आयोग द्वारा मंगलवार को घोषित लोकसभा चुनाव परिणामों के अनुसार, अन्नाद्रमुक को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के हाथों एक और अपमान का सामना करना पड़ा, जिसने 2021 के विधानसभा चुनाव में इसे (अन्नाद्रमुक को) हराया था।
आम चुनाव में द्रमुक नीत गठजोड़ और भाजपा को कड़ी टक्कर देने के बावजूद, पलानीस्वामी (70) की पार्टी अपना खाता तक नहीं खोल सकी।
वर्ष 2021 के राज्य विधानसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनावों के बाद पलानीस्वामी के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक की यह लगातार तीसरी हार है।
पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम और अन्नाद्रमुक से निकाले गए अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) नेता टी. टी. वी. दिनाकरन के साथ गठबंधन करने वाली भाजपा द्वारा अलग-थलग कर दिये गए पलानीस्वामी ने अपनी पार्टी के अकेले ही चुनाव लड़ने का निर्णय लिया, लेकिन उन्हें डीएमडीके के रूप में एक विश्वसनीय सहयोगी भी मिला।
अन्नाद्रमुक के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पलानीस्वामी ने पार्टी को मजबूत नेतृत्व प्रदान किया है और अपने प्रचार अभियान में भी आक्रामक रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें इस करारी शिकस्त के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि यह लोकसभा चुनाव इस बात पर केंद्रित है कि प्रधानमंत्री कौन होना चाहिए। फिर भी, अन्नाद्रमुक ने अपने मत प्रतिशत में उल्लेखनीय सुधार किया है।’’
हालांकि, पार्टी के एक सूत्र ने कहा कि भाजपा से अलग होने के फैसले से अन्नाद्रमुक को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा, ‘‘इसके लिए भाजपा के प्रदेश नेतृत्व को भी जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। सत्ता की भूख के कारण उन्होंने हमारे नेताओं की आलोचना की।’’
अन्नाद्रमुक ने भाजपा के समर्थन के बिना अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया, जिसके बाद राज्य में राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल गया।
प्रधानमंत्री (मोदी) के समर्थक से आलोचक बने पलानीस्वामी ने इस बार श्रीलंका को सौंपे गए कच्चातिवु द्वीप, कावेरी जल विवाद और नागरिकता (संशोधन) विधेयक (सीएए) के मुद्दे पर मोदी पर हमला बोला।
हालांकि, वह पूरे चुनाव प्रचार के दौरान अपनी चुनावी रैलियों में भारी भीड़ जुटाने में सफल रहे थे। पूर्व मुख्यमंत्री अन्नाद्रमुक के इकलौता प्रचारक थे।
पलानीस्वामी ने 2019 के चुनाव में, मुख्यमंत्री के तौर पर लोगों से केंद्र में एक स्थायी सरकार को वोट देने की अपील की थी, लेकिन इसके पांच साल बाद, इसके ठीक उलट मौजूदा आम चुनाव में उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु को प्रधानमंत्री के लगातार दौरे और रोड शो से कोई फायदा नहीं होगा।
पलानीस्वामी 2017 में उस वक्त चर्चा में रहे थे, जब उन्होंने ओ. पनीरसेल्वम के इस्तीफे के बाद विधानसभा में अपनी मजबूती साबित की और मुख्यमंत्री बने। अन्नाद्रमुक को 10 साल बाद द्रमुक द्वारा सत्ता से बेदखल करने के बाद वह 2021 में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने।
पनीरसेल्वम के साथ लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, पलानीस्वामी मार्च 2023 में अन्नाद्रमुक के महासचिव बने।
पलानीस्वामी 2017 से 2021 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे। उन्होंने एक किसान होने पर हमेशा गर्व किया और किसान हितैषी कई योजनाएं शुरू की थीं।


