नयी दिल्ली, निर्वाचन आयोग की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार, दूसरे या तीसरे स्थान पर आने वाले उम्मीदवारों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में लगी ‘माइक्रोकंट्रोलर चिप’ में छेड़छाड़ या संशोधन का सत्यापन कराने के लिए प्रति ईवीएम सेट पर 47,200 रुपये का भुगतान करना होगा।
एक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) सेट में एक बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट होता है।
निर्वाचन आयोग ने हाल ही में उच्चतम न्यायालय के फैसले के आधार पर लोकसभा चुनावों की मतगणना से पहले एक जून को ‘प्रशासनिक एसओपी’ जारी की थी।
अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम विधानसभा चुनाव के लिए रविवार को मतगणना की गई थी, जबकि आंध्र प्रदेश और ओडिशा विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को मतगणना जारी है। ये चुनाव आम चुनावों के साथ ही हुए थे।
ईवीएम में हेरफेर के संदेह को ‘निराधार’ करार देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने 26 अप्रैल को पुरानी मतपत्र प्रणाली के इस्तेमाल से चुनाव कराए जाने की मांग खारिज कर दी थी।
हालांकि इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने चुनाव परिणामों में दूसरे और तीसरे स्थान पर आने वाले उम्मीदवारों को एक विकल्प दिया था और उन्हें निर्वाचन आयोग को शुल्क का भुगतान करके व लिखित अनुरोध के जरिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पांच प्रतिशत ईवीएम में लगे ‘माइक्रोकंट्रोलर चिप’ के सत्यापन की अनुमति दी थी।
आयोग की एसओपी के अनुसार, ईवीएम की ‘जांच और सत्यापन’ करने की लागत प्रत्येक ईवीएम सेट 40,000 रुपये ( और 18 प्रतिशत जीएसटी) है। जीएसटी जोड़कर कुल खर्च 47,200 रुपये बनता है।


