प्रयागराज, एक अहम घटनाक्रम में दीवानी मामलों के न्यायाधीश के चैंबर के भीतर वादकारियों पर हमले की घटना को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 10 अधिवक्ताओं को आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया है और साथ ही उन्हें जिला अदालत परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया है।
जिला न्यायाधीश की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अदालत ने यह कार्रवाई की है। इससे पूर्व, 30 अप्रैल को अदालत ने दो अधिवक्ताओं को इसी घटना में उनकी संलिप्तता के लिए जिला अदालत परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया था।
उक्त निर्देश पारित करते हुए न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी की खंडपीठ ने कहा, “इस घटना को अत्यंत गंभीरता के साथ देखने की जरूरत है। यह अदालत इस तरह से मुकदमे की कार्यवाही में व्यवधान की अनुमति नहीं दे सकती जिसमें वादकारियों को बुरी तरह से अदालत कक्ष में पीटा जाए और पीठासीन अधिकारी को अपनी सुरक्षा के लिए अपने चैंबर की ओर भागना पड़े।”
पीठ ने कहा, “अदालत में इस प्रकार के हिंसक व्यवहार से यह व्यवस्था एक तरह से ध्वस्त हो जाएगी। यह अदालत इस तरह की घटनाओं का मूक दर्शक बनकर नहीं बैठ सकती। अराजक व्यक्तियों को यह स्पष्ट संदेश जाना आवश्यक है कि इस तरह की घटना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इससे कड़ाई से निपटा जाएगा।”
अदालत ने प्रयागराज के पुलिस आयुक्त को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जिला न्यायाधीश के निर्देश पर पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए जिससे अदालत की कार्यवाही निर्बाध रूप से संचालित हो सके।
अदालत ने पुलिस आयुक्त को यह निर्देश भी दिया कि वह एक जिम्मेदार अधिकारी को जो सहायक पुलिस आयुक्त की रैंक से नीचे का ना हो, इन व्यक्तियों का आपराधिक इतिहास खंगालने के लिए निर्देशित करे जिनके खिलाफ मौजूदा अवमानना मामले में नोटिस जारी किए गए हैं।
अदालत ने सोमवार को पारित आदेश में कहा कि पुलिस आयुक्त इस मामले में जांच की स्थिति या की गई कार्रवाई से अदालत को अवगत कराएं।


