चंडीगढ़, राजधानी दिल्ली में इन दिनों किसान आंदोलन चल रहा है। किसान एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ सड़क पर इतर गए है। सरकार और किसानों के बीच लगातार चर्चाओं का दौर जारी है। हाल ही में किसान आंदोलन में शामिल संगठन की केंद्र सरकार के मंत्रियों के साथ चौथी बार बैठक हुई। लेकिन इस बार फिर ये बैठक भी बेनतीजा रही। सरकार की तरफ से प्रस्ताव को किसानों ने खारिज कर दिया है।
केंद्र सरकार के मंत्रियों ने 5 फसलों पर MSP का प्रस्ताव दिया था जिसे किसानों ने खारिज कर दिया। जिसके बाद किसान एक बार फिर उग्र आंदोलन करने जा रहें है। आज किसान मीटिंग करके सरकार के खिलाफ रणनीति बनाएंगे और कल दिल्ली जाकर प्रदर्शन करेंगे। बता दें हरियाणा के 7 जिलों में आज रात 12 बजे तक इंटरनेट पर पाबंदी है क्योंकि शंभू बॉर्डर पर 7 दिनों से किसान आंदोलन कर रहे है।
मिली जानकारी के मुताबिक, किसानों के सामने मक्का, कपास, अरहर/तूर, मसूर और उड़द समेत पांच फसलों की खरीद को लेकर पांच साल के कॉन्ट्रेक्ट का प्रस्ताव रखा गया है। जिसे किसानों ने ठुकरा दिया। हालांकि, किसान मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि वे सी2+50% के फॉर्मूले के आधार पर ही एमएसपी की गारंटी चाहते हैं।
गौरतलब है कि 2020-21 में किसानों आंदोलन ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। जिसके बाद सरकार ने किसानों को आश्वासन दिया था कि उनकी मांगो को पूरा किया जाएगा, इसके बाद दिसंबर, 2021 में किसानों ने अपने विरोध प्रदर्शन को खत्म कर दिया था। लेकिन बाबजूद इसके सरकार ने किसानों को नजरअंदाज किया। जिसके चलते एक बार फिर किसानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
इस बार किसान एमएसपी व्यवस्था को कानूनी ढांचा देने में देरी करने की वजह से आंदोलन कर रहें है। यह आंदोलन संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने ‘दिल्ली चलो मार्च’ के नाम से शुरू किया गया है।


