अयोध्या, भक्ति में डूबी आज की संगीतमयी शाम का शुभारंभ लखनऊ से पधारे आलोक जायसवाल के भजन गायन से हुआ।
उन्होंने प्रभु श्री राम की मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप का बखान अपने गीतों..
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो, सभी मिल मंगल गाओ री अवध में राम आये हैं, सदा अपनी रसना को रसमय बना कर, हरि हर हरि हर हरि हर जपा कर, जनम सफल होगा रे बंदे मन में राम बसा ले, जो सुख पाऊं राम भजन में सो सुख नाहीं अमीरी में से बहुत ही सुन्दर चित्रण किया।
भक्ति भाव में मगन रहे राम भक्त
दूसरी प्रस्तुति में अंजुली श्रीवास्तव ने भजन पुष्प अर्पित करते.. राम की भक्ति करते गाया राम नाम अति मीठा,राम नाम का सुमिरन,बधाई गीत जन्म अवध रघुराई, कहां जा के छिपा चित चोर, मेरे मन में श्री राम, प्रभु जी मोरे अवगुण चित न धारो। राम नाम की वर्षा में दिल खोल कर भीग रहे अयोध्या आये भक्त

पद्म श्री रवींद्र जैन के प्रिय स्नेह पात्र शिष्य जय पाण्डेय उपाख्य कोकिल ने अपनी शानदार अंदाज में दी गई प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सनातन धर्म के संवाहक पूज्य शंकराचार्य जी द्वारा प्राप्त उपनाम कोकिल के नाम से विख्यात जय पाण्डेय ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत ओम मंगलम ओंकार मंगलम से करते श्री राम के द्वारा प्रथम पूजित महादेव शंकर जी को स्तुति पूर्वक याद किया।
वहीं राम कहानी सुनो हे राम कहानी, मेरा आप की कृपा से सब काम हो रहा है, हम कथा सुनाते राम सकल गुण गान की आदि भजनों की प्रभावी प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम के अंत में संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश की ओर से कार्यक्रम अधिशासी कमलेश कुमार पाठक के मार्गदर्शन में सुंदर श्री राम दरबार उकेरित स्मृति चिन्ह मानस तिवारी, अमित पाण्डेय, वैभव मिश्र द्वारा क्रमशः जय पाण्डेय “कोकिल”, अंजुली श्रीवास्तव व राजकुमार जायसवाल को भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर संगत कारों सरस्वती त्रिपाठी,लक्ष्मण पाण्डेय,मनीष त्रिपाठी,साहिल, गोल्डी, रमनदीप, विवेक कुमार, विजय सैनी, डा एच. सी. पालीवाल, मुकेश मधुर का भी शब्द सम्मान विश्व प्रकाश रूपन ने किया।