नई दिल्ली, व्हाट्सऐप जैसे मैसेजिंग ऐप के इस्तेमाल को लेकर प्रस्तावित सिम-बाइंडिंग व्यवस्था अभी लागू नहीं हुई है। हालांकि, दूरसंचार विभाग (डीओटी) के इस संबंध में जारी निर्देशों के संभावित प्रभावों पर बहस शुरू हो गई है।
एस्या सेंटर के एक अध्ययन में आशंका जताई गई है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो उपभोक्ताओं को परेशानी हो सकती है और छोटे एवं मझोले कारोबारों की लागत बढ़ सकती है। अध्ययन के मुताबिक, साइबर धोखाधड़ी रोकने में भी इससे सीमित मदद मिलने की संभावना है।
सिम-बाइंडिंग का मतलब है कि मैसेजिंग ऐप का खाता जिस मोबाइल नंबर से पंजीकृत है, उस नंबर का सिम कार्ड संबंधित मोबाइल फोन में लगा और सक्रिय रहना चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐप का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति का पंजीकृत मोबाइल नंबर और सिम कार्ड पर नियंत्रण बना रहे।
फिलहाल इस व्यवस्था को लागू नहीं किया गया है और अध्ययन में बताए गए नुकसान संभावित हैं, मौजूदा स्थिति के परिणाम नहीं।
नवंबर 2025 में दूरसंचार विभाग ने इंटरनेट आधारित मैसेजिंग ऐप कंपनियों को उपयोगकर्ताओं के खाते उनके पंजीकृत सिम कार्ड से जोड़े रखने के निर्देश दिए थे। शुरुआती निर्देश में वेब पर चल रहे ऐप सत्रों को हर छह घंटे में अपने आप बंद करने का प्रावधान भी था। बाद में इसमें बदलाव करते हुए जोखिम के आधार पर सत्र बंद करने की व्यवस्था की गई।
इन निर्देशों के संभावित असर का आकलन करने के लिए एस्या सेंटर ने ‘रीथिंकिंग इंडियाज सिम-बाइंडिंग मैनडेट: एन एम्पिरिकल असेसमेंट’ शीर्षक से अध्ययन किया। यह 18 भारतीय शहरों के 2,033 उपभोक्ताओं और 17 शहरों के 353 कारोबारों के सर्वेक्षण पर आधारित है।
अध्ययन के अनुसार, यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो खासकर विदेश यात्रा करने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है। सर्वेक्षण में शामिल विदेश यात्रा करने वाले लोगों में केवल 33 प्रतिशत भारतीय सिम कार्ड पर रोमिंग सुविधा का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 67.1 प्रतिशत स्थानीय सिम, केवल वाई-फाई या किसी दूसरे सिम कार्ड पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में पंजीकृत भारतीय सिम बंद होने या फोन से निकालने पर मैसेजिंग सेवाओं के इस्तेमाल में बाधा आ सकती है।
सर्वेक्षण में शामिल 98.88 प्रतिशत लोगों ने कहा कि मुख्य सिम बंद होने के कारण मैसेजिंग सेवाएं बंद होने पर उन्हें काफी परेशानी होगी। इसके अलावा, 97.7 प्रतिशत लोगों ने दूसरे उपकरण पर ऐप इस्तेमाल करते समय अपने आप लॉगआउट होने को दिक्कत बताया। करीब 97 प्रतिशत लोगों के मुताबिक, यात्रा के दौरान भारतीय सिम के जरिये बार-बार लॉगिन करना मुश्किल हो सकता है। आपात स्थिति में इंटरनेट कॉलिंग उपलब्ध न होने को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई।
कारोबारों पर संभावित असर को लेकर अध्ययन में बताया गया है कि सर्वेक्षण में शामिल करीब 78 प्रतिशत कारोबारों ने माना कि इस तरह की पाबंदी से उनके कामकाज पर बहुत या कुछ हद तक असर पड़ सकता है। वहीं, 83.5 प्रतिशत ने काम में देरी और गलतियां होने की आशंका जताई, जबकि करीब 82 प्रतिशत कारोबारों ने बार-बार लॉगआउट होने से सूचना साझा करने और रोजमर्रा के काम में बाधा आने की बात कही।
अध्ययन के मुताबिक, यदि सिम-बाइंडिंग की व्यवस्था लागू होती है तो कुछ उपभोक्ता वैकल्पिक इंतजाम अपना सकते हैं। सर्वेक्षण में करीब 41 प्रतिशत लोगों ने अतिरिक्त सिम कार्ड लेने और 30.3 प्रतिशत ने नया मोबाइल फोन खरीदने की संभावना जताई।
एस्या सेंटर नई दिल्ली स्थित शोध संस्थान है, जो प्रौद्योगिकी, बाजार, नवाचार और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर अध्ययन करता है। अध्ययन के निष्कर्ष सिम-बाइंडिंग के संभावित प्रभावों को दर्शाते हैं, न कि लागू हो चुकी व्यवस्था से पैदा हुई परेशानियों को।