भेलसर (अयोध्या), अयोध्या से निकलने वाले 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के निर्माण के लिए चल रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर प्रभावित किसानों और भूमि स्वामियों ने मुआवजे की दरों पर सवाल उठाए हैं।
प्रभावित लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रार्थना पत्र भेजकर भूमि की वास्तविक स्थिति के आधार पर मुआवजा निर्धारित करने, मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने और अधिग्रहण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। भूमि स्वामियों का कहना है कि मुआवजे का निर्धारण इस तरह होना चाहिए कि विकास परियोजना के कारण उन्हें अनुचित आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
प्रभावित भूमि स्वामियों का प्रमुख सवाल यह है कि जिन भूखंडों का बैनामा आवासीय या व्यावसायिक सर्किल रेट के आधार पर हुआ था, उन्हें अधिग्रहण के समय कृषि भूमि की श्रेणी में रखकर मुआवजा देने का आधार क्या है। उ
नका कहना है कि यदि जमीन की खरीद-बिक्री के समय उसका मूल्यांकन आवासीय अथवा व्यावसायिक उपयोग के अनुसार किया गया था, तो अधिग्रहण के दौरान भूमि की श्रेणी और मुआवजे की दर तय करते समय उस स्थिति पर विचार किया जाना चाहिए।
भूमि स्वामियों के मुताबिक, जमीन की प्रकृति और उपयोग के आधार पर मूल्य में बड़ा अंतर हो सकता है। ऐसे में यदि मुआवजे की गणना कृषि भूमि की दरों से की जाती है, तो उन्हें अपेक्षा से कम राशि मिलने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि संबंधित भूखंडों का वर्गीकरण किन अभिलेखों, नियमों और मानकों के आधार पर किया गया है।
प्रार्थना पत्र में सर्किल रेट और वास्तविक बाजार मूल्य के अंतर का मुद्दा भी उठाया गया है। प्रभावित लोगों का कहना है कि मुआवजा तय करते समय भूमि की वास्तविक स्थिति, आसपास के क्षेत्र में प्रचलित दरों और लागू कानूनी प्रावधानों पर समुचित विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने मूल्यांकन में किसी भी तरह की विसंगति की निष्पक्ष जांच कराने और जरूरत पड़ने पर मुआवजे का पुनर्मूल्यांकन करने की मांग की है।
भूमि स्वामियों ने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिलाने की अपील की है। उनका कहना है कि 84 कोसी परिक्रमा मार्ग जैसी महत्वपूर्ण परियोजना के निर्माण के साथ-साथ भूमि अधिग्रहण से प्रभावित लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
हालांकि, मुआवजे की दरों, भूखंडों के वर्गीकरण और अधिग्रहण प्रक्रिया पर प्रशासन का पक्ष तथा संबंधित भूमि अभिलेखों की जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।