फ्रांस में जीवनयापन की बढ़ती लागत और स्कूलों की खराब स्थिति के विरोध में शनिवार को निकाले गए मार्च के दौरान हिंसा, आगजनी और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। पेरिस पुलिस के मुताबिक, हिंसक झड़पों और दुकानों में लूटपाट के सिलसिले में 855 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस और अर्द्धसैनिक बल के 13 अधिकारी तथा दो दमकलकर्मी घायल हुए। इस बीच, प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।
पेरिस में शनिवार को आयोजित विरोध मार्च में करीब 1.10 लाख लोग शामिल हुए। वहीं, पूरे फ्रांस में हुए प्रदर्शनों में अधिकारियों के अनुसार लगभग 5.50 लाख लोगों ने हिस्सा लिया, जबकि आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब 8 लाख बताई।
पेरिस में अफरा-तफरी और कोहराम! आगजनी, लूटपाट और झड़पों से दहली फ्रांस की राजधानी
पेरिस में सरकार विरोधी प्रदर्शन हिंसक हो गए। इस दौरान दुकानों, रेस्तरां और गाड़ियों में आग लगा दी गई। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।
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— RT Hindi (@RT_hindi_) October 18, 2026
प्रदर्शन के दौरान कुछ नकाबपोश समूहों ने सिटी हॉल और स्थानीय सरकारी कार्यालयों समेत सार्वजनिक इमारतों को निशाना बनाया।
पुलिस के मुताबिक, मध्य पेरिस में कई सौ से लेकर 1,000 से अधिक लोगों के समूहों ने अनधिकृत मार्च निकाले। दोपहर के समय स्थिति बिगड़ गई और हिंसक घटनाएं शुरू हो गईं। पुलिस ने आरोप लगाया कि कुछ लोग विरोध-प्रदर्शन के दौरान पैदा हुई अव्यवस्था का फायदा उठाकर चोरी और लूटपाट करने के इरादे से पहुंचे थे।
रविवार सुबह पेरिस के प्लेस डे ला रिपब्लिक के आसपास सड़कों पर उखड़े पत्थर, क्षतिग्रस्त दुकानों और बिखरे कांच के टुकड़े दिखाई दिए। चौक के आसपास और शहर के केंद्र में स्थित कुछ अन्य पर्यटक स्थलों तथा खरीदारी वाले इलाकों में भी तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं।
पुलिस के बयान के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। फ्रांसीसी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, मार्च के दौरान सड़क पर एक प्रदर्शनकारी की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी।
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू और गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने हिंसा के लिए कट्टर वामपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया। दोनों ने कहा कि बाद में लूटपाट के इरादे से अन्य लोग भी इसमें शामिल हो गए। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।