लखनऊ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 15 पूर्व सैनिकों को शनिवार को अंतरिम राहत देते हुए उन्हें 2025 भर्ती प्रक्रिया के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल एवं समान पदों पर सीधी भर्ती के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) में शामिल होने की अनुमति दे दी।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस परीक्षा में शामिल होने से उन्हें पात्रता के दावे का कोई विशेषाधिकार नहीं मिल जाएगा।
न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने मनोज कुमार पांडेय और 14 अन्य की याचिका पर यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि उन्होंने लिखित परीक्षा उत्तीर्ण की थी और दस्तावेज सत्यापन पूरा किया था, लेकिन उन्हें इस आधार पर पीईटी में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई कि उन्होंने स्वेच्छा से रक्षा सेवा से अवकाश लिया था।
उच्चतम न्यायालय के एक निर्णय का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील दी गई थी कि जिन कर्मियों ने सेवा की निर्धारित अवधि पूरी की है और पेंशन प्राप्त की है, उन्हें पूर्व सैनिकों को उपलब्ध आरक्षण के लाभों से महज इसलिए वंचित नहीं किया जा सकता कि उन्होंने अपने नियोक्ता की सहमति से स्वेच्छा से सेवा छोड़ी है।
इस दलील का विरोध करते हुए राज्य सरकार ने कहा कि ये याचिकाकर्ता संबंधित नियमों के तहत निर्धारित पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करते हैं और इन्होंने चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण में अदालत का रुख किया।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया संबंधित प्रावधान को पढ़ने पर इन याचिकाकर्ताओं की पात्रता के बारे में सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, अदालत ने कहा कि इस मामले में विचार करने की आवश्यकता है।
अदालत ने राज्य सरकार को अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए 10 दिनों का समय दिया और याचिकाकर्ताओं को इसके तीन दिनों बाद अपना जवाब दाखिल करने को कहा। इस मामले में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।