नयी दिल्ली, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली 57वीं जीएसटी परिषद ने बृहस्पतिवार को जीएसटी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई प्रस्तावों को मंजूरी दी। वित्त मंत्री के साथ राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली परिषद ने कहा कि ये सुधार भरोसे के सिद्धांत पर आधारित हैं।
जीएसटी परिषद की बैठक में व्यापक सुधारों को मंजूरी दी गई है। बैठक में लिए गए प्रमुख फैसले इस प्रकार हैं—
जीएसटी अधिकारियों का गिरफ्तारी का अधिकाार खत्म किया गया और अभियोजन शुरू करने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये की गई।
सामान्य जुर्माने की राशि 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये की गई।
कर की मांग 10,000 रुपये से कम होने पर कोई नोटिस जारी नहीं किया जाएगा।
ई-कॉमर्स मंच पर कारोबार करने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया सरल की गई।
जीएसटी दरों में बदलाव अब साल में एक बार किया जाएगा।
रिफंड दावे को स्वीकार करने की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन की गई।
जोखिम आकलन के आधार पर अधिकांश रिफंड तीन कामकाजी दिन के भीतर मंजूर किए जाएंगे।
आपूर्तिकर्ता द्वारा कर का भुगतान नहीं किए जाने से जुड़े इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के मुद्दे की जांच के लिए अधिकारियों की एक समिति गठित की जाएगी, जो तीन महीने में रिपोर्ट देगी।
संयंत्र एवं मशीनरी तथा इनपुट (कच्चा माल) सेवाओं पर जमा आईटीसी के रिफंड की सुविधा उपलब्ध कराई गई। नियोक्ता अपने कर्मचारियों के लिए लिए गए स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर आईटीसी का दावा कर सकेंगे।
माल ले जाने वाले वाहनों को रोकने के लिए वरिष्ठ अधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी।
कारोबार के मुख्य स्थान समेत जीएसटी पंजीकरण में संशोधन की प्रक्रिया आसान की गई।
जीएसटी नीति से जुड़े सुधार एक अप्रैल, 2027 से प्रभावी होंगे।
ये सुधार एक अप्रैल, 2027 से लागू किए जाएंगे।
सीतारमण ने कहा, ‘‘कंपनियों पर भरोसा करना होगा। करदाताओं पर भरोसा करना होगा। और कंपनियों के बीच भी भरोसा होना चाहिए। अगर वे ऐसा करते हैं तो हमें बहुत ज्यादा दखल देने की जरूरत नहीं होनी चाहिए…। जीएसटी की अगली पीढ़ी के सुधारों में दर और प्रक्रिया, दोनों से जुड़े 99 प्रतिशत मुद्दों का समाधान कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि परिषद ने तेजी से रिफंड देने पर सहमति जताई है। इसके तहत रिफंड आवेदन की प्राप्ति की पुष्टि की अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी जाएगी।
यदि 10 दिन के भीतर न तो प्राप्ति की पुष्टि की जाती है और न ही कमी संबंधी सूचना जारी की जाती है, तो आवेदन को प्राप्त हुआ माना जाएगा।
सीतारमण ने कहा, ‘‘जोखिम आकलन के आधार पर प्रणाली के जरिये 90 प्रतिशत दावों को प्राप्ति की पुष्टि के तीन कार्यदिवस के भीतर मंजूरी मिलने की उम्मीद है।’’
उन्होंने कहा कि इससे रिफंड स्वतः मिलने लगेगा और कंपनियों की कार्यशील पूंजी में वृद्धि होगी।
मंत्री ने कहा कि परिषद ने पांच करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले और केवल उपभोक्ताओं को आपूर्ति करने वाले कारोबारियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत साल में केवल एक बार रिटर्न दाखिल करना होगा और तिमाही आधार पर कर का भुगतान करना होगा।
इसकी विस्तृत रूपरेखा पर परिषद की अगली बैठक से पहले फैसला किया जाएगा।
ये सुधार अप्रत्यक्ष करों के प्रवर्तन के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। गिरफ्तारी का अधिकार खत्म किया जाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
मौजूदा केंद्रीय जीएसटी कानून की धारा 69 के तहत आयुक्त को निर्धारित शर्तों के अंतर्गत केंद्रीय कर अधिकारी को कुछ अपराधों के संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार करने की अनुमति देने का अधिकार है।
इस बदलाव से कर वसूली और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावी रूप से अलग कर दिया गया है। कर अधिकारी कर, ब्याज और लागू जुर्माने का आकलन और वसूली जारी रखेंगे, लेकिन सामान्य कर विवाद में जांच के स्तर पर करदाता को गिरफ्तारी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
यह बदलाव जीएसटी प्रशासन को ‘फेसलेस’ यानी अधिकारियों से सीधे संपर्क के बिना और प्रौद्योगिकी आधारित बनाने की व्यापक पहल का भी हिस्सा है। इसका उद्देश्य करदाताओं और अधिकारियों के बीच अनावश्यक संपर्क की गुंजाइश कम करना, विभिन्न क्षेत्रों में एकरूपता बढ़ाना और अधिकारियों के विवेकाधिकार को सीमित करना है।
कंपनियों के लिए इसका मतलब यह हो सकता है कि जीएसटी अनुपालन व्यक्तिगत अधिकारियों के रवैये पर कम और रिटर्न, बिल, ई-वे बिल, इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावों तथा अन्य डिजिटल रिकॉर्ड से मिलने वाले आंकड़ों पर अधिक निर्भर होगा।
ये फैसले जुलाई 2017 में जीएसटी लागू किए जाने के समय बनाई गई प्रवर्तन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव को प्रतिबिंबित करते हैं।
परिषद की एक अन्य प्रमुख सिफारिश यह है कि कर्मचारियों के लिए लिए गए स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर संबंधित कंपनियों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध होगा।
दूरसंचार टावर और कारखाने के बाहर बिछाई गई पाइपलाइन पर भी इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध होगा। इन क्षेत्रों के लिए ये बड़े खर्च की मदें हैं।
परिषद ने मुफ्त नमूनों और ऐसे माल के नष्ट होने की स्थिति में भी इनपुट टैक्स क्रेडिट की सिफारिश की है, जिसकी उपयोग अवधि समाप्त हो गई हो और कानून के तहत उसे नष्ट करना जरूरी हो।
परिषद ने परिवहन के दौरान माल के मामले में सिफारिश की है कि वाहन को केवल विशेष खुफिया सूचना के आधार पर रोका जाए। वाहन रोकने के फैसले को संयुक्त आयुक्त या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी से पहले ही मंजूरी लेनी होगी।
माल जिस राज्य से चला है और जिस राज्य में पहुंचना है, केवल उन्हीं राज्यों को सामान की जांच करने की अनुमति होगी। मार्ग में पड़ने वाले अन्य राज्य वाहन को नहीं रोक सकेंगे।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) के तहत पंजीकृत और कई राज्यों में कारोबार करने वाले करीब दो लाख करदाताओं के लिए केंद्रीकृत आकलन व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है।
फिलहाल सीजीएसटी क्षेत्राधिकार में करीब 69.5 लाख ऐसे करदाता हैं जो केवल सीजीएसटी के तहत आते हैं। इनमें से करीब दो लाख करदाता एक राज्य के भीतर या अलग-अलग राज्यों में कई सीजीएसटी क्षेत्राधिकार के तहत आते हैं।
सीतारमण ने कहा, ‘‘हमारा इरादा आने वाले समय में कई सीजीएसटी क्षेत्राधिकार वाले इन करदाताओं के लिए केंद्रीकृत कर प्रशासन लाने का है। इसमें सीजीएसटी से जुड़े सभी कार्यों के लिए एकीकृत व्यवस्था होगी।
उन्होंने कहा कि पिछले साल की गई कर दरों में कटौती से राजस्व में कोई कमी नहीं आई है। कर संग्रह लगातार बढ़ा है।