नई दिल्ली, अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के बीच भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को लेकर विवाद तेज होता दिखाई दे रहा है।
मस्क ने रिलायंस से जुड़ी कंपनियों द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को दिए गए राजनीतिक चंदे और सोशल मीडिया पर चुनावी अभियानों से संबंधित पुरानी खबरों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए हैं।
यह कदम उन्होंने मुकेश अंबानी को व्यंग्यात्मक अंदाज में ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ कहकर संबोधित करने और उन पर बाजार में एकाधिकार बनाए रखने की कोशिश करने का आरोप लगाने के कुछ ही घंटे बाद उठाया।
— Elon Musk (@elonmusk) October 10, 2026
मस्क ने अपनी पोस्ट में सवाल किया कि क्या मुकेश अंबानी भारत में उनकी कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देना चाहेंगे। उनका यह बयान भारत में स्टारलिंक की व्यावसायिक सेवाएं शुरू होने में हो रही देरी के बीच आया है। मस्क का आरोप है कि बाजार में पहले से मौजूद कारोबारी समूह प्रतिस्पर्धा को सीमित रखना चाहते हैं।
मस्क द्वारा साझा की गई खबरों में रिलायंस से जुड़ी कंपनियों और भाजपा के बीच राजनीतिक चंदे तथा सोशल मीडिया चुनाव प्रचार से संबंधित पुराने दावे शामिल हैं। एक रिपोर्ट में रिलायंस से जुड़ी कंपनी क्विक सप्लाई द्वारा चुनावी बॉन्ड के माध्यम से भाजपा को 385 करोड़ रुपये और शिवसेना को 25 करोड़ रुपये दिए जाने की जानकारी प्रकाशित की गई थी।
दूसरी रिपोर्ट में रिलायंस द्वारा वित्तपोषित एक कंपनी की ओर से फेसबुक पर भाजपा के चुनावी अभियानों को बढ़ावा देने से संबंधित दावे किए गए थे। इन खबरों को साझा करना अपने आप में किसी नए आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है।
इस विवाद के बीच केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपग्रह संचार सेवाओं के लिए तीन कंपनियों को लाइसेंस दिए जा चुके हैं। इनमें रिलायंस जियो, भारती समूह से जुड़ी वनवेब और मस्क की स्टारलिंक शामिल हैं। कंपनियों को आवश्यक सुरक्षा शर्तें और निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ही सेवाएं शुरू करने की अनुमति मिलेगी।
सरकार का कहना है कि उपग्रह इंटरनेट सेवाओं के संचालन के लिए निर्धारित नियमों और सुरक्षा संबंधी शर्तों का पालन जरूरी है। ऐसे में स्टारलिंक की भारत में शुरुआत का मामला केवल कारोबारी प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नियामकीय मंजूरी और सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाएं भी शामिल हैं।
फिलहाल, मस्क के ताजा पोस्ट ने रिलायंस, भाजपा को मिले राजनीतिक चंदे और भारत में सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।