कीव, यूक्रेन ने दावा किया है कि उसकी ओर से किए गए लंबी दूरी के हवाई हमलों के कारण रूस की 51 प्रतिशत तेल शोधन क्षमता ठप हो गई है। यूक्रेन के मुताबिक, इन हमलों का असर रूसी सेना को तेल और ईंधन की आपूर्ति करने की क्षमता पर भी पड़ा है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि मॉस्को, यारोस्लाव, उस्त-लुगा, पर्म, सेराटोव और सिजरान समेत कई शहरों में स्थित तेल रिफाइनरियों को हाल के हमलों में निशाना बनाया गया। यूक्रेन का कहना है कि इन हमलों के कारण रूस की कुल तेल शोधन क्षमता का 51 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है।
यूक्रेन के अनुसार, करीब 1,200 किलोमीटर लंबी अग्रिम पंक्ति पर जमीनी लड़ाई में काफी हद तक गतिरोध के बीच रूस और यूक्रेन दोनों ने हवाई हमले तेज कर दिए हैं। यूक्रेनी सेना ने रूस के मॉस्को से लेकर साइबेरिया तक स्थित तेल रिफाइनरियों पर लगातार हमले किए हैं।
यूक्रेन का दावा है कि इन हमलों का असर रूस के ईंधन क्षेत्र पर भी पड़ा और इस साल की शुरुआत में वहां बड़े पैमाने पर ईंधन संकट की स्थिति बनी थी। इसके चलते रूसी अधिकारियों को कुछ समय के लिए पेट्रोल की बिक्री सीमित करनी पड़ी थी।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी हाल में तेल रिफाइनरियों पर हुए हमलों के आर्थिक प्रभाव का जिक्र किया था। पुतिन ने कहा था कि यूक्रेन ने रूस की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया और इन हमलों का कुछ असर पड़ा है। उनके अनुसार, इन हमलों के कारण रूस के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में करीब एक प्रतिशत की कमी आई है।
यूक्रेन के रक्षा मंत्री येवहेनी खमारा ने कहा कि यूक्रेन की खुफिया एजेंसियों, जनरल स्टाफ और रक्षा मंत्रालय के विश्लेषकों ने इन हमलों के प्रभाव का आकलन किया है। उनके मुताबिक, यूक्रेन की ओर से निशाना बनाई गई तेल शोधन क्षमता का 51 प्रतिशत प्रभावित होना रूस की अर्थव्यवस्था, उसकी सैन्य कार्रवाई जारी रखने और सैनिकों को आपूर्ति करने की क्षमता के लिए बड़ा झटका है।