अयोध्या, 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण को लेकर जनौरा नाका में हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अब सिर्फ सड़क चौड़ीकरण तक सीमित नहीं रह गई है। मकानों पर बुलडोजर चलने के बाद स्थानीय लोगों के विरोध के साथ भाजपा से जुड़े लोगों और कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी सामने आई है।
इसी बीच प्रभावित परिवारों के साथ विधायक वेद प्रकाश गुप्ता का जिलाधिकारी से मिलना और मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित किया जाना प्रशासनिक कार्रवाई पर उठ रहे सवालों के बीच महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
जनौरा नाका क्षेत्र में 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण के लिए रविवार को जिला प्रशासन ने नजूल भूमि पर बने मकानों को ध्वस्त कराया। स्थानीय लोगों ने कार्रवाई का विरोध किया। रिपोर्टों के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी रही।
प्रशासन का कहना है कि चिह्नित भवन चौड़ीकरण की जद में थे और प्रभावित भवन स्वामियों को मुआवजे का भुगतान पहले ही किया जा चुका था। कुछ प्रभावित लोग मामले को लेकर हाईकोर्ट भी गए थे और प्रशासन ने हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
कार्रवाई के बाद भाजपा महिला मोर्चा की पदाधिकारी और स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सड़क के मध्य बिंदु को आधार बनाकर दोनों ओर से चौड़ीकरण होना है तो एक तरफ के मकानों पर ही अधिक कार्रवाई क्यों हुई। भाजपा महिला मोर्चा की ओर से कार्रवाई में समानता और पारदर्शिता की मांग की गई।
इसी बीच प्रभावित परिवार विधायक वेद प्रकाश गुप्ता के साथ जिलाधिकारी के पास पहुंचे। परिवारों ने आरोप लगाया कि चौड़ीकरण के लिए भूमि लिए जाने में निर्धारित मानकों का समान रूप से पालन नहीं हुआ। उनका कहना है कि सड़क के मध्य से दोनों तरफ समान रूप से भूमि ली जानी चाहिए थी। विधायक ने भी मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि नियमों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में वास्तव में तय मानकों का पूरी तरह पालन हुआ था? इसी सवाल का जवाब तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है। कमेटी चौड़ीकरण के मानकों, भूमि लिए जाने की प्रक्रिया और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जांच करेगी।
दूसरा सवाल प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे को लेकर है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित भवनों का मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है, जबकि प्रभावित लोगों की ओर से कार्रवाई और भूमि लिए जाने की प्रक्रिया पर आपत्तियां उठाई गई हैं। ऐसे में जांच कमेटी की रिपोर्ट इस विवाद में महत्वपूर्ण होगी।
रात में हुई कार्रवाई को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में बताया गया है कि दिन की कार्रवाई के बाद देर रात भी कुछ मकानों को गिराया गया। हालांकि, प्रशासन की ओर से रात में कार्रवाई किए जाने के पीछे अलग से कोई विस्तृत कारण इन रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं किया गया है। इसलिए इस पहलू पर आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार रहेगा।
14 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण की प्रक्रिया नई नहीं है। अयोध्या जिला प्रशासन के रिकॉर्ड में इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से संबंधित अधिसूचनाएं और सामाजिक प्रभाव आकलन से जुड़ी प्रक्रिया दर्ज है। अगस्त 2026 में भी 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के लिए दो गांवों से संबंधित भूमि अधिग्रहण अधिसूचना प्रकाशित की गई थी।
अब मामला तीन सदस्यीय कमेटी की जांच पर टिक गया है। जनता की आपत्तियां, भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी, प्रभावित परिवारों के सवाल और प्रशासन का अपना पक्ष—इन सभी के बीच कमेटी की रिपोर्ट यह स्पष्ट कर सकती है कि ध्वस्तीकरण और चौड़ीकरण की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप हुई या नहीं।