रूस में तीन दिवसीय संसदीय चुनाव रविवार को अंतिम चरण में पहुंच गया। इस बार पहली बार यूक्रेन के उन क्षेत्रों के निवासियों को भी रूसी स्टेट ड्यूमा के चुनाव में शामिल किया गया है, जिन पर रूस ने 2022 में अपने कब्जे के बाद विलय का दावा किया था। इनमें दोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया के रूसी नियंत्रण वाले हिस्से शामिल हैं। रूस के अनुसार इन क्षेत्रों में 35 लाख से अधिक मतदाता हैं।
रूस में मतदान 18 सितंबर से शुरू हुआ और 20 सितंबर तक चल रहा है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कब्जे वाले क्षेत्रों और रूस की सीमा से लगे कुछ इलाकों में मतदान इससे पहले ही शुरू कर दिया गया था। क्रीमिया में भी मतदान हो रहा है, जिस पर रूस ने 2014 में कब्जे के बाद अपना दावा किया था।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इन क्षेत्रों में मतदान को महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि वहां के निवासी रूस के साथ कथित पुन:एकीकरण के बाद पहली बार स्टेट ड्यूमा के लिए मतदान कर रहे हैं। यह चुनाव फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के आक्रमण के बाद पहला संसदीय चुनाव है।
वहीं, यूक्रेन ने इन क्षेत्रों में रूसी चुनाव कराने की कड़ी निंदा की है और विदेशी सरकारों तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों से चुनाव और इसके परिणामों को मान्यता नहीं देने की अपील की है। यूक्रेनी मानवाधिकार समूहों ने कुछ इलाकों में लोगों पर मतदान के लिए दबाव बनाए जाने के आरोप भी लगाए हैं।
यूरोपीय संघ ने भी कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों में कराए जा रहे मतदान को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है और कहा है कि वह इन चुनावों या इनके परिणामों को मान्यता नहीं देगा।
रूस की 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा के लिए हो रहे चुनाव के शुरुआती परिणाम रविवार शाम से सामने आने की उम्मीद है।