वाशिंगटन, अमेरिका की संघीय अदालत में प्रमुख कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कंपनियों Anthropic, OpenAI, SpaceXAI और Google के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है। मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि इन कंपनियों ने AI तकनीक के विकास की गति को धीमा करने के लिए आपस में समन्वय किया, जो अमेरिकी प्रतिस्पर्धा-विरोधी कानूनों का उल्लंघन हो सकता है। मामला शुक्रवार को अमेरिका के उत्तरी कैलिफोर्निया जिले की संघीय अदालत में दायर किया गया।
मुकदमे में ChatGPT, Claude, Grok और Gemini जैसी सशुल्क AI सेवाओं के चार ग्राहकों ने याचिका दायर की है और इसे देशभर के अन्य सशुल्क ग्राहकों की ओर से प्रस्तावित सामूहिक मुकदमे के रूप में आगे बढ़ाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि प्रमुख AI कंपनियों के बीच विकास की गति सीमित करने का कोई समझौता प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है और इससे उपभोक्ताओं को मिलने वाले लाभ में कमी आ सकती है।
मामले का प्रमुख आधार 12 सितंबर 2026 को Anthropic के CEO डारियो अमोदेई की ओर से प्रकाशित एक लेख बताया गया है। अमोदेई ने AI के विकास की गति को अधिक सावधानी से आगे बढ़ाने और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की अपील की थी। उन्होंने स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन और AI कंपनियों के बीच सुरक्षा मानकों पर सहयोग सहित कई उपाय सुझाए थे।
मुकदमे के अनुसार, उसी दिन OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन, SpaceXAI के CEO एलन मस्क और Google DeepMind के सह-संस्थापक एवं अध्यक्ष डेमिस हसाबिस ने अमोदेई के प्रस्तावों पर सार्वजनिक रूप से समर्थन जताया। याचिकाकर्ताओं ने इन सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं को कंपनियों के बीच कथित समन्वय के सबूत के रूप में पेश किया है। हालांकि, अदालत में लगाए गए आरोपों की अभी न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है।
AI विकास की रफ्तार को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब उद्योग में सुरक्षा और तेजी से तकनीकी प्रगति के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज है। अमोदेई ने तर्क दिया है कि AI क्षमताओं के तेजी से बढ़ने के साथ सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी है। दूसरी ओर, AI कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा और तकनीकी बढ़त बनाए रखने की कोशिशें लगातार जारी हैं।
मुकदमे के मुख्य वकील निक रॉली ने निजी कंपनियों के बीच AI सुरक्षा से जुड़े संभावित समझौतों पर सवाल उठाया है। कंपनियों की ओर से मुकदमा दायर होने के समय तत्काल विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी। अब इस मामले में अदालत यह तय करेगी कि याचिकाकर्ताओं के आरोप कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं।