न्यूयॉर्क, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के वैश्विक जनसंपर्क अभियान के तहत संघ प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका पहुँच चुके हैं। 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित मैडिसन स्क्वायर गार्डन (एमएसजी) में आयोजित होने वाले भव्य कार्यक्रम में वे लगभग 5,000 प्रबुद्धजनों और प्रवासी भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे।
भागवत ने कहा था कि “यदि शेर अकेला होता है, तो जंगली कुत्ते भी उस पर हमला कर शिकार बना सकते हैं।”
संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय अभियान का मुख्य उद्देश्य वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म के उदात्त मूल्यों और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना है।
संघ प्रमुख की इस ऐतिहासिक यात्रा के तीन प्रमुख उद्देश्य तय किए गए हैं।
पहला—विश्व के समक्ष भारत, हिंदू समाज और संघ के राष्ट्र-निर्माण तथा सामाजिक समरसता के सकारात्मक दृष्टिकोण को रखना।
दूसरा—दुनिया भर में फैले भारतीय मूल के लोगों के साथ सभ्यतागत संवाद स्थापित कर उनकी सांस्कृतिक पहचान और हितों को संबल प्रदान करना।
तीसरा—वैश्विक शांति, भाईचारे और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का मार्ग प्रशस्त करना।
हालांकि, संघ प्रमुख के अमेरिका पहुंचने के साथ ही विरोधी गुटों और इंडियन ओवरसीज कांग्रेस (आईओसी) द्वारा इस यात्रा को लेकर विवाद खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है।
विरोध करने वाले संगठन संघ पर भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों के हनन और राजनीतिक विचारधारा के प्रसार के आरोप लगा रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर, आरएसएस समर्थकों और विचारकों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि संघ सदैव से चरित्र निर्माण, राष्ट्र सेवा और सामाजिक एकजुटता में समर्पित एक विशुद्ध सांस्कृतिक संगठन रहा है। विरोधियों द्वारा फैलाया जा रहा नैरेटिव सनातन धर्म के व्यापक और समावेशी स्वरूप को कमजोर करने की साजिश मात्र है।
अमेरिका में मोहन भागवत के कार्यक्रमों के दौरान हंगामे और विरोध का यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले 2018 में जब वे शिकागो में स्वामी विवेकानंद के 1893 के ऐतिहासिक भाषण की 125वीं वर्षगांठ पर आयोजित ‘वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस’ में शामिल होने पहुंचे थे, तब भी विरोध प्रदर्शन हुए थे।
उस समय अपने संबोधन में भागवत ने कहा था कि “यदि शेर अकेला होता है, तो जंगली कुत्ते भी उस पर हमला कर शिकार बना सकते हैं।” जब विरोधियों ने नारेबाज़ी शुरू की, तो वहां मौजूद विशाल भारतीय समुदाय ने एक सुर में ‘भारत माता की जय’ के गूंजते नारों से पूरे माहौल को राष्ट्रभक्ति से सराबोर कर दिया था।
अमेरिका में पिछले कुछ वर्षों में भारतीय समुदाय के बीच संघ की पैठ काफी मजबूत हुई है। सांस्कृतिक गतिविधियों, सामुदायिक मेल-मिलाप और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संवाद के जरिए संगठन ने अपनी पकड़ बनाई है। 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाला मोहन भागवत का संबोधन वैश्विक पटल पर भारत की चेतना का एक नया अध्याय लिखेगा।










