नई दिल्ली, देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति साफ कर दी है। भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी विस्तृत नोट में कहा गया है कि एथेनॉल उत्पादन के कारण देश में चीनी की कमी नहीं हुई है।
सरकार ने फिलहाल एथेनॉल के लिए चीनी के इस्तेमाल पर किसी पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा नहीं की है, बल्कि चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और जमाखोरी रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं।
सरकार के अनुसार, देश में घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक उपलब्ध है और नया पेराई सत्र अक्टूबर से शुरू होने वाला है। हालांकि, कम उत्पादन, त्योहारी मांग, मौसम से फसल को नुकसान, वैश्विक बाजार में तेजी और कुछ कारोबारियों की जमाखोरी के कारण हाल के सप्ताहों में चीनी की कीमतों में तेजी देखी गई है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक वर्ष 2025-26 में भारत का गन्ना उत्पादन बढ़कर 500 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) तक पहुंच गया है। वर्ष 2015-16 में यह उत्पादन 348.44 एमएमटी था। यानी पिछले दस वर्षों में गन्ना उत्पादन में लगभग 43.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
गन्ने की खेती का रकबा भी 49.27 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 58.87 लाख हेक्टेयर हो गया है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य बने हुए हैं। चीनी निर्यात भी 2016-17 के 0.47 लाख एमटी से बढ़कर 2025-26 में करीब 8 लाख एमटी पहुंच गया।
सरकार ने चीनी सीजन 2026-27 के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य यानी एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह 10.25 प्रतिशत की बेसिक रिकवरी दर पर लागू होगा।
क्या एथेनॉल बनाने के लिए चीनी की खपत बढ़ गई?
सरकार ने इस धारणा को गलत बताया है कि एथेनॉल उत्पादन के कारण घरेलू बाजार में चीनी की कमी हो रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत था, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9 प्रतिशत रह गया है।
सरकार का कहना है कि देश में बनने वाले कुल एथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाजों, विशेषकर मक्का से तैयार किया जा रहा है। ऐसे में यह कहना सही नहीं होगा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के कारण बाजार में चीनी की कमी हो गई है।
एथेनॉल कार्यक्रम से गन्ना किसानों और चीनी मिलों को भी फायदा हुआ है। सरप्लस चीनी को एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल करने से मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई और किसानों के भुगतान में सुधार हुआ है। 20 अगस्त 2026 तक 2025-26 चीनी सीजन के लिए गन्ना किसानों के करीब 97 प्रतिशत बकाए का भुगतान किया जा चुका था।
सरकार के अनुसार, चीनी की खुदरा कीमत 20 जुलाई 2026 को 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। यानी करीब एक महीने में कीमत में लगभग 15.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
हालांकि सरकार ने इसे लंबी अवधि की स्थायी तेजी नहीं माना है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2024 से जुलाई 2026 के बीच चीनी की कीमतों में औसतन सालाना वृद्धि केवल करीब 3 प्रतिशत रही।
सरकार के मुताबिक मौजूदा तेजी के पीछे कई कारण हैं। इनमें अनुमान से कम घरेलू उत्पादन, त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी मांग, अत्यधिक बारिश और जलभराव से गन्ने की फसल को नुकसान, रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियां, वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतें तथा कुछ कारोबारियों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं।
वर्तमान चीनी सीजन में शुरुआती अनुमान करीब 343 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का था, लेकिन अब उत्पादन लगभग 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। इसके बावजूद सरकार का कहना है कि नए पेराई सीजन की शुरुआत तक देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है।
सरकार ने यह भी बताया कि चीनी की कमी केवल भारत की समस्या नहीं है। वर्ष 2026-27 में दुनिया भर में करीब 33 लाख मीट्रिक टन चीनी की कमी का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत 30 जून 2026 को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त तक 552 डॉलर प्रति टन पहुंच गई, जो दो महीने से कम समय में 16 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।
चीनी की कीमतों पर नियंत्रण और कृत्रिम कमी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। देशभर के चीनी डीलरों के लिए 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की गई है।
इसके अलावा 1 सितंबर 2026 से थोक उपभोक्ताओं को अपनी 15 दिन की खपत से अधिक चीनी स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त टीमें चीनी मिलों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी कर रही हैं।
सरकार ने एहतियाती कदम के तौर पर घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने का फैसला किया है।
राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से गन्ने की पेराई शुरू करने की सलाह दी गई है। इससे अक्टूबर में सामान्य 3 से 4 लाख टन के मुकाबले 10 लाख टन से अधिक चीनी उत्पादन की उम्मीद है और त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में आपूर्ति बेहतर हो सकेगी।
केंद्र सरकार का स्पष्ट कहना है कि फिलहाल एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध की बात सही नहीं है। सरकार का जोर चीनी की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने, जमाखोरी रोकने, उपभोक्ताओं को राहत देने, किसानों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और चीनी उद्योग की आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाने पर है।









