अयोध्या, तहसील रुदौली क्षेत्र के ग्राम गजकरी में सरकारी प्रक्रिया के तहत हुई तालाब की नीलामी के 11 महीने बीत जाने के बाद भी आवंटी महिला को न तो रजिस्ट्री मिली और न ही कब्जा। न्याय पाने के लिए दर-दर भटक रही पीड़िता ने अब प्रशासनिक सांठगांठ और अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर आयुक्त प्रशासन (अयोध्या मंडल) अजय कांत सैनी ने एसडीएम रुदौली को जांच कर तत्काल कब्जा दिलाने के आदेश दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम मखदूमपुर (परगना बसौढ़ी) निवासी मीरा पत्नी रमेश चंद्र (निषाद जाति) ने उपजिलाधिकारी रुदौली से लेकर मुख्यमंत्री तक लिखित शिकायत भेजी है। पीड़िता का कहना है कि ग्राम गजकरी स्थित गाटा संख्या 74 (क्षेत्रफल 1.110 हेक्टेयर) की मत्स्य पालन हेतु नीलामी 4 सितंबर 2025 को तहसील रुदौली में हुई थी।
उन्होंने सबसे ऊंची बोली लगाकर यह पट्टा हासिल किया और तहसीलदार रुदौली के यहाँ 6,000 रुपये जमा कर रसीद (संख्या 779006) प्राप्त की थी। आरोप है कि रसीद कटने के 11 माह बाद भी तहसील प्रशासन उनकी न तो रजिस्ट्री करा रहा है और न ही कब्जा दिला रहा है।
पीड़िता का आरोप है कि तालाब पर बिना किसी पट्टे के बरसाती लाल रावत नामक व्यक्ति जबरन कब्जा जमाए बैठा है। शासनादेश के अनुसार मत्स्य पालन पट्टे में निषाद जाति को प्रथम वरीयता दी जाती है, जबकि विपक्षी पासी जाति का है। महिला ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी पिछले एक साल से अवैध रूप से मछली निकालकर बेच रहा है और इसका आधा हिस्सा स्थानीय राजस्व कर्मियों तक पहुँच रहा है। इसी वजह से तहसील प्रशासन मामले को लटका रहा है ताकि रसीद की एक साल की मियाद पूरी होने पर इसे स्वतः निरस्त दिखाया जा सके।
मामले का संज्ञान लेते हुए अपर आयुक्त प्रशासन (अयोध्या मंडल) अजय कांत सैनी ने उपजिलाधिकारी रुदौली को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
आदेश में कहा गया है कि यदि तालाब की नीलामी नियमानुसार और विधिपूर्वक हुई है, तो बिना किसी विलंब के मत्स्य आवंटी को तत्काल कब्जा दिलाने की प्रभावी कार्रवाई की जाए।










