नयी दिल्ली, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन की इकाई अमेजन सेलर सर्विसेज पर अपने मंच पर साधारण मिठाइयों को ‘श्री राम मंदिर अयोध्या प्रसाद’ के नाम से बेचने वाली भ्रामक सूची प्रदर्शित करने के मामले में एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
CCPA के चार अगस्त को पारित आदेश के मुताबिक, प्राधिकरण ने पाया कि अमेजन के ई-कॉमर्स मंच पर साधारण मिठाइयां ‘श्री राम मंदिर अयोध्या प्रसाद’ के नाम से बेची जा रही थीं, जबकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इनके लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी।
सीसीपीए ने अमेजन सेलर सर्विसेज को निर्देश दिया कि आदेश में उल्लिखित धार्मिक संस्थानों एवं तीर्थस्थलों से संबंधित कोई भी ऐसा उत्पाद, जो ‘प्रसाद’, ‘प्रसादम’, ‘महाप्रसाद’, ‘भोग’ या इसी तरह का धार्मिक चढ़ावा होने का दावा करता हो, संबंधित संस्था से अनुमति का सत्यापन योग्य दस्तावेजी प्रमाण लिए बगैर उसके मंच पर सूचीबद्ध, प्रदर्शित या बिक्री के लिए पेश न किया जाए।
अमेजन ने राम जन्मभूमि मंदिर, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम, श्री माता वैष्णो देवी मंदिर, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, श्री जगन्नाथ मंदिर, श्री केदारनाथ मंदिर, श्री बद्रीनाथ मंदिर, श्री सोमनाथ मंदिर, श्री द्वारकाधीश मंदिर और श्री महाकालेश्वर मंदिर समेत 10 प्रमुख धार्मिक संस्थानों एवं तीर्थस्थलों से जुड़ा एक ढांचा भी प्राधिकरण के समक्ष पेश किया।
सीसीपीए ने अपने आदेश में कहा कि ‘श्री राम मंदिर अयोध्या प्रसाद’ शब्द का भक्तों के बीच एक विशिष्ट एवं सुस्पष्ट अर्थ है और यह अयोध्या के राम मंदिर में भगवान को अर्पित और उनके आशीर्वाद प्राप्त पवित्र भोजन को दर्शाता है।
प्राधिकरण ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अनुमति के बिना साधारण मिठाई उत्पादों के लिए इस नाम का व्यावसायिक इस्तेमाल उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत भ्रामक व्यापार व्यवहार है।
यह मामला कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की 19 जनवरी, 2024 को की गई शिकायत के बाद सामने आया था। शिकायत के मुताबिक, अमेजन डॉट इन पर ‘श्री राम मंदिर अयोध्या प्रसाद’ के नाम से चार मिठाई उत्पाद 299 से 385 रुपये की कीमत में बेचे जा रहे थे।
सीसीपीए ने अमेजन को उसी दिन कारण बताओ नोटिस जारी किया था। यह नोटिस 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से तीन दिन पहले जारी किया गया था।
आदेश के मुताबिक, अमेजन ने नोटिस मिलने के बाद इन उत्पादों को सूची से हटा दिया था। कंपनी ने अपने बचाव में कहा था कि वह केवल एक मध्यस्थ है और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत उसे ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण मिला हुआ है।
सीसीपीए ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि ई-कॉमर्स नियम और सूचना प्रौद्योगिकी कानून अलग-अलग कानूनी दायरों में काम करते हैं तथा उपभोक्ता संरक्षण से जुड़ी अमेजन की जिम्मेदारियां केवल मध्यस्थ होने के आधार पर खत्म नहीं हो जाती हैं।
प्राधिकरण के महानिदेशक (जांच) की विस्तृत जांच में यह भी पाया गया कि अमेजन के मंच पर विक्रेता से संबंधित जानकारी ई-कॉमर्स नियमों के अनुरूप पर्याप्त रूप से प्रदर्शित नहीं की गई थी। प्राधिकरण ने कहा कि उसकी शिकायत निवारण व्यवस्था में अनिवार्य लॉग-इन की आवश्यकता भी थी, जिससे स्पष्ट और सुगम जानकारी उपलब्ध कराने की जरूरत पूरी नहीं होती।
आदेश के अनुसार, संबंधित चार उत्पादों की कुल बिक्री 25,26,309 रुपये रही, जबकि इन उत्पादों से वास्तविक राजस्व 39,802.29 रुपये था। इसमें अमेजन को सेवा शुल्क के रूप में 15,165.90 रुपये मिले थे









