एक अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 सत्र के लिए शुरुआती स्टॉक कम रहने की संभावना के चलते मंगलवार को पूरे देश में चीनी की औसत मिल कीमत 5,400-5,500 रुपये प्रति क्विंटल के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। एक उद्योग निकाय ने यह जानकारी दी।
एक साल पहले मिल कीमत 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी, जिससे पता चलता है कि सालाना आधार पर इसमें भारी बढ़ोतरी हुई है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मिल दरों में बढ़ोतरी के साथ ही चीनी की औसत खुदरा कीमत भी 13 प्रतिशत बढ़कर 18 अगस्त को 52.3 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो एक साल पहले 46.34 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
नए 2026-27 सत्र (अक्टूबर-सितंबर) के लिए शुरुआती स्टॉक के 50 लाख टन की घरेलू जरूरत से कम रहने की संभावना है। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस आंकड़े को अंतिम रूप नहीं दिया है।
अनुमानों में काफी अंतर है। उद्योग का एक वर्ग पहले का बचा स्टॉक को 40-42 लाख टन मानता है, जबकि शोधकर्ता इसे कम, यानी 32-35 लाख टन बताते हैं — जो नए सत्र की शुरुआत में आपूर्ति की तंगी की स्थिति की ओर इशारा करता है।
इसकी तुलना में, मौजूदा 2025-26 सत्र की शुरुआत एक अक्टूबर, 2025 को 47 लाख टन के शुरुआती स्टॉक के साथ हुई थी।
शुरुआती स्टॉक, इस साल 280 लाख टन के अनुमानित उत्पादन और सात लाख टन के निर्यात को ध्यान में रखते हुए, 2025-26 के लिए कुल उपलब्धता 320 लाख टन बैठती है, जबकि घरेलू जरूरत 285 लाख टन की होती है। इससे 35 लाख टन का पहले का स्टॉक बचता है — जो 50 लाख टन की जरूरत से भी कम है, और इससे मिल कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
खाद्य मंत्रालय देश भर की मिलों द्वारा बेचे जा रहे चीनी के स्टॉक पर कड़ी नजर रख रहा है। मिलों को निर्देश दिया गया है कि वे ऑनलाइन फॉर्म और जांचे गये ईमेल आईडी का इस्तेमाल करके खरीदारों को बेचे गए और उनके द्वारा उठाए गए स्टॉक की सही जानकारी दें, ताकि देश में चीनी की उपलब्धता की साफ तस्वीर मिल सके।










