अयोध्या, मोहर्रम का महीना इस्लाम के मानने वालो के लिए सच्चाई के रास्ते पर चलने, सब्र करने और जालिम के सामने न झुकने की याद दिलाता है। यह इस्लामी साल का पहला महीना है। यह महीना हक, इंसाफ व इंसानियत का महीना है, यह बाते कारी अजीमुद्दीन खां बरेलवी ने जुमे में खिताब करते हुए कही।
उन्होंने कर्बला का वाक्या बयान करते हुए कहा कि मोहर्रम आते ही कर्बला का वाक्या सुनने के बाद आंखें नम हो जाती है। उन्होंने कहा कि चाहे कितना ही पत्थर दिल इंसान हो, इस वाकए को सुनकर वह भी रो देता है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक की नही बल्कि हक और इंसानियत बचाने की थी। अपनो से बिछड़ना पड़ा,गम उठाना पड़ा, तब जाकर हक की जीत हुई।
कारी अजीमुद्दीन खां बरेलवी ने कहा कि कर्बला की लड़ाई में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के परिवार को बड़े दुख व तकलीफे उठानी पड़ी और जंग के मैदान में बिना दाना पानी के दस दिनों तक दुश्मनों से लड़ाई लड़ते रहे, लेकिन किसी के भी चहरे पर शिकन न थी।
बल्कि हंसते हंसते हक के परचम को बुलंद करने के लिए शहादत दी। हजरत मोहम्मद साहब के निवासो ने यह साबित कर दिया कि इस्लाम की जड़ों को उन्होंने खून से सींचा है और जब तक दुनिया कायम रहेगी तब तक इस्लाम कायम रहेगा और जंग में शहीद होने वालो का नाम सुनहरे पन्नों में लिखा रहेगा।
उन्होंने कहा कि उनके परिवार पर दुश्मनों द्वारा किए गए जुल्मों को सह कर दुनिया के सामने एक मिशाल बना दी। उन्होंने अल्लाह के बारगाह में दुआ मांगते हुए कहा कि हर इस्लाम के मानने वालो को नबी के बताए हुए रास्ते पर जिंदगी गुजारने वाला बना दे और हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की इतब्बा करने वाला बना दे।
उन्होंने कहा कि कर्बला की याद कभी दिल से भुलाई न जायेगी। उन्होंने कहा कि मोहर्रम की 9वी और 10 वी के रोजे रखे, इन रोजो का सवाब तीस रोजो के बराबर है।










