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कई बुजुर्ग डिजिटल दुनिया से खुद को अलग-थलग क्यों महसूस करते हैं?

ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360 by ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360
June 10, 2026
in Featured
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डिजिटल दौर में प्रौद्योगिकी ने हमारा दैनिक जीवन काफी आसान कर दिया है। अब लोग अपने स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन देख सकते हैं और एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) की मदद से ईमेल भी आसानी से लिख सकते हैं।

लेकिन न्यूजीलैंड के कई बुजुर्गों के लिए तेजी से प्रगति करती प्रौद्योगिकी ने अवसरों के दरवाजे खोलने के बजाय एक दीवार खड़ी कर दी है। ऑनलाइन फॉर्म भरना, बार-बार बदलते ऐप इस्तेमाल करना, ऑफलाइन सेवाओं का कम होना और ऑनलाइन ठगी का लगातार खतरा उनके लिए कठिन हो सकता है।

इस परेशानी के लिए एक शब्द है – ‘टेक्नोस्ट्रेस’ (प्रौद्योगिकीय तनाव)। पहले इसका इस्तेमाल कामकाजी लोगों में प्रौद्योगिकी से होने वाली चिंता और परेशानी के लिए किया जाता था, लेकिन अब इसका उपयोग उन बुजुर्गों के लिए भी होने लगा है जो डिजिटल दुनिया में खुद को पीछे छूटा हुआ महसूस करते हैं।

हालांकि समय के साथ बुजुर्गों के बीच डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ा है, फिर भी 50 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग आधे लोगों को लगता है कि आधुनिक प्रौद्योगिकी में वे पीछे छूट रहे हैं।

सरकारी सेवाओं को और अधिक डिजिटल बनाने की योजना के बीच, 60 वर्ष से अधिक उम्र के 40 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को सरकारी ऑनलाइन जानकारी हासिल करने में परेशानी होती है।

बुजुर्गों के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करना आज पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है ताकि वे जरूरी सेवाओं का लाभ ले सकें और सामाजिक संबंध बनाए रख सकें। इसके बिना उनके मानसिक, सामाजिक, बौद्धिक, शारीरिक व आर्थिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।

हाल ही में प्रकाशित हमारे शोध में 65 वर्ष से अधिक उम्र के 23 लोगों से बातचीत की गई। इससे पता चला कि प्रौद्योगिकी के साथ उनका संबंध काफी जटिल है। प्रौद्योगिकी एक ओर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है, तो दूसरी ओर तनाव व अलगाव का कारण भी बनी है।

-दोधारी तलवार-

हमने जिन लोगों से बात की, उनके अनुभव अलग-अलग थे। कुछ लोग प्रौद्योगिकी का बहुत कम उपयोग करते थे, जैसे सिर्फ फोन कॉल या संदेश भेजने के लिए। वहीं कुछ लोग रोजमर्रा के कामों और नौकरी के लिए प्रौद्योगिकी पर काफी निर्भर थे। एक प्रतिभागी ने बताया कि वह रचनात्मक लेखन में मदद के लिए एआई सहायक का उपयोग करती हैं।

लेकिन चाहे वे प्रौद्योगिकी में कितने भी कुशल हों, सभी को लगता था कि नयी प्रौद्योगिकी के साथ कदम मिलाकर चलना एक कभी खत्म न होने वाली, लेकिन जरूरी चुनौती है। यह समस्या खास तौर पर उन लोगों में ज्यादा दिखी जिन्होंने नौकरी के दौरान प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया था, लेकिन रिटायरमेंट के बाद नयी चीजें सीखने के लिए उनके पास कम साधन उपलब्ध थे।

एक और आम चिंता यह थी कि उम्र ज्यादा होने के कारण ऑनलाइन ठगों के लिए उन्हें आसान शिकार समझा जाता है। एकमात्र आय या पेंशन पर निर्भर लोगों के लिए किसी ठगी का शिकार होना आर्थिक रूप से बहुत नुकसानदायक हो सकता है। इस डर के कारण भी कई लोग इंटरनेट का उपयोग करने से बचते हैं।

कुल मिलाकर हमें पता चला कि बुजुर्गों के लिए प्रौद्योगिकी एक दोधारी तलवार जैसी है। जो लोग डिजिटल दुनिया में खुद को शामिल महसूस करते हैं, उनके लिए प्रौद्योगिकी परिवार और दोस्तों से जुड़ाव मजबूत बनाती है। वे विदेश में रहने वाले अपने परिजन के साथ फोटो और वीडियो साझा कर सकते हैं और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

लेकिन जो लोग खुद को इससे अलग महसूस करते हैं, उनके लिए प्रौद्योगिकी तनाव, निराशा और खुद को अयोग्य समझने का कारण बन जाती है।

हमारे शोध में शामिल लोगों ने बताया कि ऑनलाइन पेंशन आवेदन भरना मुश्किल होता है या किसी सॉफ्टवेयर के अचानक बदल जाने पर उसे फिर से सीखना पड़ता है।

-उम्र के आधार पर भेदभाव-

लगभग सभी प्रतिभागियों का मानना था कि डिजिटल प्रौद्योगिकियों को बुजुर्गों को ध्यान में रखकर नहीं बनाया जाता। उन्हें लगता है कि बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां उन्हें महत्वपूर्ण उपयोगकर्ता नहीं मानतीं।

फिर भी कई लोग प्रौद्योगिकी के साथ तालमेल न बिठा पाने के लिए खुद को ही दोषी मानते है। कुछ लोगों ने बताया कि मदद मांगने पर उन्हें उपेक्षापूर्ण व्यवहार का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी निराशा और बढ़ जाती है।

यह स्थिति ‘डिजिटल एजिज्म’ (उम्र के आधार पर भेदभाव) की ओर इशारा करती है। इसमें यह मान लिया जाता है कि बुजुर्ग लोग प्रौद्योगिकी का कम इस्तेमाल करते हैं क्योंकि वे इसे समझ नहीं सकते या सीखना नहीं चाहते।

वास्तव में डिजिटल दुनिया में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए केवल इच्छा होना काफी नहीं है। इसके लिए प्रेरणा, कौशल, आत्मविश्वास, संसाधनों तक पहुंच, भरोसा और पर्याप्त सहयोग भी जरूरी है।

इसलिए यह केवल उम्र का नहीं बल्कि समान अवसरों का मुद्दा है। अच्छी बात यह है कि न्यूजीलैंड में कई संगठन और लोग इस समस्या को हल करने के लिए काम कर रहे हैं। इनमें जागरूकता समूह और पुस्तकालयों में चलाए जाने वाले डिजिटल कौशल कार्यक्रम शामिल हैं।

कुछ स्थानीय कंपनियों ने बुजुर्गों के लिए आसान डिजिटल टैबलेट और कम कीमत वाले मोबाइल प्लान जैसी सुविधाएं भी शुरू की हैं। हालांकि ये प्रयास महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अभी और काम करने की जरूरत है।

Tags: कई बुजुर्ग डिजिटल दुनिया
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