अयोध्या में राम मंदिर, वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर, मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर और बांके बिहारी मंदिर तथा मिर्जापुर में विंध्यवासिनी मंदिर सहित उत्तर प्रदेश के प्रमुख मंदिरों ने मंगलवार को चंद्र ग्रहण के कारण अपने कार्यक्रम में बदलाव किया।
काशी विश्वनाथ मंदिर के पदाधिकारियों के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा और अपराह्न तीन बजकर 27 मिनट से शाम छह बजकर 47 मिनट तक देखा जाएगा।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मंदिरों में ‘सूतक काल’ के दौरान नियमित अनुष्ठान और दर्शन नहीं होते।
वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट ने बताया कि परंपरा के अनुसार, ग्रहण शुरू होने से पहले मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, इसी परंपरा का पालन करते हुए तड़के चार बजकर 30 मिनट पर मंदिर के द्वार बंद कर दिए गए। ग्रहण के समापन के बाद ‘मोक्ष’ से जुड़ी विधियां और शुद्धिकरण किए जाएंगे।
What's up for March?
The Moon will appear red during a total lunar eclipse on March 3. On the 8th, Venus and Saturn snuggle close in the night sky. Plus, March 20 is the first day of spring in the Northern Hemisphere. More: https://t.co/Ohi4c6w6FR pic.twitter.com/KwWkJzxyvr
— NASA (@NASA) March 2, 2026
मंदिर भक्तों के लिए शाम सात बजकर 15 मिनट पर खोल दिया जाएगा।
अयोध्या में राम मंदिर को सूतक काल के कारण सुबह नौ बजे बंद कर दिया गया। मंदिर सूत्रों के अनुसार तड़के चार बजकर 30 मिनट पर मंगला आरती और छह बजकर 30 मिनट पर श्रृंगार आरती निर्धारित समय के अनुसार संपन्न हुई।
राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के अनुसार आठ बजकर 15 मिनट पर रामलला को ‘बाल भोग’ लगाया गया। श्रृंगार आरती के बाद सुबह छह बजकर 30 मिनट पर से नौ बजे तक दर्शन की अनुमति थी जिसके बाद मंदिर के द्वार बंद कर दिए गए और शाम की आरती के बाद आठ बजकर 30 मिनट से 11 बजे तक दर्शन उपलब्ध होंगे।
मथुरा और वृंदावन में अधिकांश मंदिर सुबह दर्शन के लिए जल्दी बंद कर दिए गए और ग्रहण समाप्त होने के बाद शाम सात बजे पुनः खोले जाएंगे।
हालांकि, ऐतिहासिक द्वारकाधीश मंदिर अपने नियमित समय पर खुला रहा। मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने कहा कि पुष्टिमार्ग परंपरा में भगवान कृष्ण की बाल रूप में पूजा की जाती है और भक्तों का मानना है कि कठिन समय में उन्हें देवता के साथ रहना चाहिए।
वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर सुबह पांच बजकर 15 मिनट पर खुला और आठ बजकर 30 मिनट पर बंद कर दिया गया।
मंदिर की उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने बताया कि इसे शाम सात बजे पुनः खोलकर रात 10 बजे बंद किया जाएगा।
मथुरा के श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर में मंगला आरती सुबह पांच बजे हुई और छह बजे कपाट बंद कर दिए गए।
श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने कहा कि मंदिर शाम आठ बजे पुनः खुलेगा और रात नौ बजे बंद किया जाएगा।
बरसाना के राधा रानी मंदिर में सेवायत माधव कृष्ण गोस्वामी ने बताया कि मंदिर शाम सात बजे सात बजे खुलेगा और रात नौ बजे कपाट बंद कर दिए जाएंगे।
मिर्ज़ापुर में ग्रहण के मद्देनजर विंध्यवासिनी मंदिर सुबह बंद रहा।
विंध्य पंडा समाज के भानु पाठक ने बताया कि सूतक और ग्रहण काल में अपराह्न तीन बजकर 15 मिनट से रात आठ बजे तक मंदिर के द्वार बंद रहेंगे। अनुष्ठान और आरती के बाद भक्तों को पूजा करने की अनुमति दी जाएगी।
राज्यभर के मंदिर पदाधिकारियों ने भक्तों से संशोधित कार्यक्रम का पालन करने और ग्रहण के मद्देनजर की गई व्यवस्थाओं में सहयोग करने की अपील की।










