गोरखपुर स्थित पुलिस आवास निगम कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर पर तैनात यशवंत की लाश बस्ती जिला में पड़ी मिली है। यशवंत मंगलवार रात घरवालों से कहकर ममेरे भाई अंकित के साथ बाइक पर अयोध्या जाने निकला था, फिर लापता हो गया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच हत्या के एंगल से तेज कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, यशवंत कुमार मंगलवार शाम करीब आठ बजे ड्यूटी से छुट्टी लेकर घर लौट रहे थे। परिवार के अनुसार वह नगर बाजार तक पहुंच भी गए थे, लेकिन इसके बाद घर नहीं पहुंचे। बताया गया है कि घर से निकलते समय उन्होंने ममेरे भाई अंकित के साथ बाइक से अयोध्या जाने की बात कही थी। इसके बाद उनका मोबाइल फोन बंद हो गया और परिजन उनसे संपर्क नहीं कर सके। रातभर तलाश के बाद बुधवार सुबह वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के धमौरा के पास एक युवक का शव मिलने की जानकारी पुलिस और परिवार को मिली। मौके पर पहुंचने पर शव की पहचान यशवंत के रूप में हुई।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यशवंत की बाइक और शव के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में मिलने को लेकर है। यशवंत की बाइक दुबौलिया थाना क्षेत्र के बैरागल गांव के पास निर्माणाधीन टोल प्लाजा के निकट लावारिस मिली थी। रिपोर्टों के अनुसार बाइक पर पुलिस का स्टीकर भी लगा था।
इसके कुछ दूरी पर नहीं, बल्कि करीब 30 किलोमीटर दूर वाल्टरगंज क्षेत्र में यशवंत का शव मिला। इस वजह से पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यशवंत की बाइक वहां कैसे पहुंची और उनकी मौत के बाद शव को घटनास्थल तक किस तरह लाया गया।
शुरुआत में मौत का कारण स्पष्ट नहीं था, इसलिए पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। रिपोर्टों के मुताबिक, यशवंत के सीने की तीन हड्डियां टूटी मिलीं। शरीर के कई हिस्सों पर चोट के निशान थे और गर्दन पर नाखून के निशान भी बताए गए हैं। माथे और पैर के अंगूठे पर भी चोट के निशान मिले। इन परिस्थितियों के आधार पर पुलिस ने इसे सामान्य मौत मानने के बजाय हत्या की दिशा में जांच शुरू कर दी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, गौरा तिराहे से शव मिलने वाली जगह तक सड़क पर खून के धब्बे भी दिखाई दिए थे। पुलिस और फोरेंसिक टीम ने मौके का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए हैं। हालांकि इन निशानों की वास्तविक वजह और घटना के क्रम की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि यशवंत पर हमला कहां हुआ और शव को धमौरा के पास किसने छोड़ा।
यशवंत के मोबाइल फोन का अब तक पता नहीं चल पाया है। पुलिस उनके मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), लोकेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है। साथ ही घटनास्थल और यशवंत के संभावित रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि नगर बाजार पहुंचने के बाद यशवंत किन लोगों के संपर्क में आए और आखिरी बार उन्हें किसके साथ देखा गया था।
पुलिस ने मामले की जांच के लिए कई टीमें लगाई हैं। अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत के अनुसार, परिवार की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर विभिन्न बिंदुओं पर जांच की जा रही है। पुलिस घटना के पीछे के कारण का पता लगाने के लिए यशवंत के परिचितों और उनके संपर्क में रहे लोगों से भी पूछताछ कर रही है। अभी तक हत्या के पीछे का कारण और किसी आरोपी की पहचान पुलिस की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई है।
यशवंत अविवाहित थे। उनके बड़े भाई हेमंत भी कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत बताए गए हैं, जबकि पिता ओम प्रकाश दिल्ली में निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर इस रहस्यमय मौत की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।